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Shimla News: चमियाना अस्पताल की लैब में स्टाफ का टोटा, देरी से मिल रही टेस्ट रिपोर्ट

Tue, 29 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 11:59 PM IST
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Chamiyana Hospital's lab is short of staff, resulting in delayed test reports.
मेडिकल लैबोरेटरी तकनीशियन के 20 में से 10 पद रिक्त, कर्मचारियों को दिन-रात देनी पड़ती है ड्यूटी
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सैंपल लेने से लेकर रिपोर्ट तैयार करने का कर रहे काम
लैब असिस्टेंट के 12 पदों में से केवल 11 पद हैं रिक्त
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी चमियाना की सेंट्रल लैब में तकनीकी स्टाफ की कमी है। लैब में मात्र 13 कर्मचारी तैनात हैं। इस कारण मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
लैब में 21 पद रिक्त हैं। इसमें मेडिकल लैबोरेटरी तकनीशियन के 20 में से 10 और लैब असिस्टेंट के 12 पदों में से 11 पद हैं रिक्त पड़े हैं। वहीं लैब में तैनात कर्मचारियों में से दो-तीन की ड्यूटी आपातकालीन स्थिति में रात को लगती है, जबकि दो कर्मचारी छुट्टी पर रहते हैं। ऐसे में दिन के समय मात्र नौ कर्मचारी ही कार्य कर रहे हैं। यह कर्मचारी न केवल सैंपल लेने का काम करते हैं, बल्कि सैंपल को मशीन में लगाने से लेकर रिपोर्ट तैयार करने तक की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
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स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को प्रयोगशाला में सैंपल देने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल में चीफ लैब तकनीशियन के दो पद स्वीकृत हैं और दोनों पर कर्मचारियों की तैनाती है। अस्पताल में सुबह 8:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक सैंपल एकत्र करने का काम होता है। इस कारण मरीजों की सुबह से ही कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण अस्पताल में रिपोर्ट मिलने में भी देरी हो जाती है। अलग-अलग कल्चर और फ्लूड टेस्ट भी नहीं हो पा रहे हैं। इस कारण मरीजों को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के चक्कर काटने पड़ते हैं। आपात स्थिति में मरीज निजी लैब में टेस्ट करवाते हैं, जहां उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ते हैं। आईजीएमसी में जांच करवाने के कारण यूरिन समेत ब्लड कल्चर और बॉडी फ्लूड टेस्ट की रिपोर्ट मरीजों को तीन से सात दिन बाद मिलती है। इस कारण मरीजों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
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गौरतलब है कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में रोजाना की ओपीडी 1200 तक पहुंच गई है। यहां प्रदेशभर से मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नेफ्रोलॉजी, एंडोक्रिनोलॉजी, कार्डियोलॉजी, यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग हैं। इस कारण सभी विभागों से मरीजों को रक्त संबंधी जांचें लिखी जाती हैं। अस्पताल में रोजाना 500 से ज्यादा सैंपल की जांच की जा रही है।



क्रस्ना लैब में एक बजे के बाद होते हैं टेस्ट
क्रस्ना लैब में सैंपल एकत्र करने का काम 1:00 बजे के बाद किया जाता है। इससे पहले सरकारी लैब में भीड़ लगी रहती है। एक बजे के बाद सरकारी लैब में टेस्ट नहीं होते। इसके बाद मरीजों को क्रस्ना लैब में टेस्ट के लिए जाना पड़ता है। यहां भी कर्मचारियों की कमी है और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।



कोट
अस्पताल में 24 घंटे लैब को चलाया जा रहा है, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान की जा सके। लैब में और स्टाफ की तैनाती के लिए सरकार से आग्रह किया है। उम्मीद है कि जल्द तकनीशियनों की तैनाती हो जाएगी।
-डॉ. ब्रिज शर्मा, प्राचार्य, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना
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