लटक सकती है बोर्डों-निगमों में अध्यक्ष-उपाध्यक्षों की ताजपोशी
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हिमाचल प्रदेश में बोर्डों और निगमों में अध्यक्षों-उपाध्यक्षों की ताजपोशी का मामला और आगे लटक सकता है। लोकसभा चुनाव को सामने देखते हुए राज्य सरकार असंतुष्ट भाजपा नेताओं को और नाराज नहीं करना चाह रही है। कुछ ताजपोशियों को करने के बाद ज्यादातर पदों को खाली छोड़ा जा सकता है।
लंबे समय से पदाधिकारी सरकारी ओहदों पर ताजपोशी की बाट जोह रहे हैं। पिछले महीने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का दौरा तय किया गया तो यह माना जाने लगा कि उनके हिमाचल आगमन के बाद सीएम ये ताजपोशियां कर सकते हैं।
प्रदेश में मानसून से भारी नुकसान के बीच अमित शाह का दौरा रद्द हो गया था। पिछले दिनों पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का देहांत हुआ तो अब यह दौरा जल्दी तय हो पाना मुश्किल माना जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो सीएम के करीबियों में अब तक ताजपोशी से वंचित नेताओं के नामों पर खूब चर्चा चल रही है। इनमें पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों और अन्य तमाम नेताओं के नामों पर विचार चल रहा है। कई नेता इसके लिए लगातार दबाव भी बना रहे हैं।
मगर इस बीच इस बात पर भी गौर किया जा रहा है कि ताजपोशियों के लिए एक अनार सौ बीमार की स्थिति बनी हुई है। कहीं ऐसा न हो कि करीब तीन दर्जन बोर्डों-निगमों में तमाम ताजपोशियों के बाद भी भाजपा के कई नेता असंतुष्ट ही रहें।
इसका गलत असर आगे लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह भी संभव है कि दर्जन भर नेताओं की तैनाती बाकी पदों को खाली ही छोड़ दिया जाए।