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अफसरों की बड़ी चूक, केंद्र से मिली आर्थिक मदद ही कर दी सरेंडर

Wed, 04 Jul 2018 12:57 PM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 04 Jul 2018 12:57 PM IST
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centre grants lapse due to negligence of himachal govt officers

एक ओर हिमाचल सरकार की अफसरशाही तंगहाली का रोना रोती रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र से जो आर्थिक मदद मिल रही है उसे सरेंडर कर दिया गया। अफसरों की इस चूक का एक ताजा उदाहरण फिर सामने आया है। मामला बेशक बहुत बड़ी रकम का न हो, मगर इससे व्यवस्था की खामी सामने आई है।

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केंद्र सरकार ने हिमाचल को 27 मई को जारी किए एक पत्र से इस लापरवाही को उजागर किया है। इसमें जनजातीय कॉफी टेबल बुक और अन्य मदों के लिए 39.70 लाख रुपये के स्थान पर 10 लाख रुपये ही जारी किए गए हैं। साथ ही केंद्र ने पल्ला झाड़ा है कि अब उसके पास हिमाचल का कोई बकाया नहीं है। 
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केंद्र सरकार की ओर से जारी पत्र के अनुसार वर्ष 2016-17 में जनजातीय मामले मंत्रालय ने 39.70 लाख रुपये जनजातीय भाषाओं के शब्दकोष, जनजातीय लैंडस्केप पर कॉफी टेबल बुक और कबायली क्षेत्रों के लिए संवैधानिक तथा अन्य प्रावधानों के लिए मंजूर किए गए थे। पर पिछला पैसा खर्च होने के कारण न तो 2016-17 में ये पैसा जारी हुआ और न ही अगले वित्त वर्ष में ही जारी किया गया।

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100 करोड़ से ज्यादा बजट जारी

centre grants lapse due to negligence of himachal govt officers

अब हिमाचल सरकार ने वर्ष 2016-17 में हुए इस मद के खर्च के लिए रुपये ही मांगे तो केंद्र सरकार ने 10 लाख रुपये जारी किए हैं। वर्ष 2018-19 के लिए केंद्र सरकार ने जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के लिए 1.33 करोड़ रुपये मंजूर किए। इनमें से लंबित 28 लाख रुपये भी दिए हैं। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के अवर सचिव नदीम अहमद ने इसकी अधिसूचना जारी की है। 

भारत सरकार ने कई अन्य मदों में भी करीब 100 करोड़ रुपये की केंद्रीय ग्रांट जारी की है। केंद्र ने शिमला स्मार्ट सिटी के लिए दो करोड़ रुपये, आंगनबाड़ियों के लिए 62 करोड़ रुपये,  ट्राइबल उप योजना के लिए 28 लाख रुपये, विशेष केंद्रीय मदद 1.02 करोड़ रुपये, पूंजीगत ढांचे के सृजन के लिए 6.90 करोड़, कृषि जनगणना योजना के लिए 15.81 और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा के लिए 4.50 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

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