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केंद्र ने राजस्व घाटा अनुदान घटाकर किया अन्याय : मेयर
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सीमित राजस्व संसाधन में काम आता है बजट
प्रदेश को 1952 से मिल रहा था यह अनुदान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। केंद्र की ओर से राजस्व घाटा अनुदान घटाने को लेकर शहर के महापौर सुरेंद्र चौहान भड़क गए हैं। महापौर ने कहा कि यह उन राज्यों को मिलता है जिनके राजस्व खातों में केंद्र से टैक्स मिलने के बाद घाटा बना रहता है लेकिन उसे भी कम कर देना किसी सूरत में ठीक नहीं है। अनुदान को घटाकर हिमाचल के साथ केंद्र ने अन्याय किया है।
नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने बताया साल 1952 से यह अनुदान हिमाचल को मिल रहा है। केंद्र सरकार हिमाचल जैसे राज्यों को उनके रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्चे वेतन, पेंशन और विकासात्मक कार्यों के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए यह बजट देती है। महापौर ने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियां होने के कारण सड़कों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण और रखरखाव में मैदानों की तुलना में बहुत अधिक खर्च आता है। सीमित राजस्व संसाधन उद्योग, वाणिज्यिक गतिविधियों और अन्य व्यवसायों के हिमाचल में सीमित स्रोत हैं।
राज्य की अपनी कमाई (कर राजस्व) बेहद कम है। फिक्सड कॉस्ट होने के कारण कर्मचारियों का वेतन, पेंशन और राज्य पर पहले से भारी कर्ज का ब्याज चुकाने में ही बजट का बड़ा हिस्सा चला जाता है। इससे विकासात्मक कार्यों के लिए पैसा कम पड़ता है। महापौर ने हिमाचल के सांसदों पर तंज कसते हुए कहा कि बजट बनाने के दौरान हिमाचल के सांसद वहां रहते तो उनके द्वारा भी इस मामले पर अपनी बात न रख पाना सीधे तौर पर हिमाचल की जनता के साथ धोखा है।
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प्रदेश को 1952 से मिल रहा था यह अनुदान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। केंद्र की ओर से राजस्व घाटा अनुदान घटाने को लेकर शहर के महापौर सुरेंद्र चौहान भड़क गए हैं। महापौर ने कहा कि यह उन राज्यों को मिलता है जिनके राजस्व खातों में केंद्र से टैक्स मिलने के बाद घाटा बना रहता है लेकिन उसे भी कम कर देना किसी सूरत में ठीक नहीं है। अनुदान को घटाकर हिमाचल के साथ केंद्र ने अन्याय किया है।
नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने बताया साल 1952 से यह अनुदान हिमाचल को मिल रहा है। केंद्र सरकार हिमाचल जैसे राज्यों को उनके रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्चे वेतन, पेंशन और विकासात्मक कार्यों के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए यह बजट देती है। महापौर ने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियां होने के कारण सड़कों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण और रखरखाव में मैदानों की तुलना में बहुत अधिक खर्च आता है। सीमित राजस्व संसाधन उद्योग, वाणिज्यिक गतिविधियों और अन्य व्यवसायों के हिमाचल में सीमित स्रोत हैं।
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राज्य की अपनी कमाई (कर राजस्व) बेहद कम है। फिक्सड कॉस्ट होने के कारण कर्मचारियों का वेतन, पेंशन और राज्य पर पहले से भारी कर्ज का ब्याज चुकाने में ही बजट का बड़ा हिस्सा चला जाता है। इससे विकासात्मक कार्यों के लिए पैसा कम पड़ता है। महापौर ने हिमाचल के सांसदों पर तंज कसते हुए कहा कि बजट बनाने के दौरान हिमाचल के सांसद वहां रहते तो उनके द्वारा भी इस मामले पर अपनी बात न रख पाना सीधे तौर पर हिमाचल की जनता के साथ धोखा है।
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