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Shimla News: सब्जी मंडी परिसर में रखा दिया सीमेंट और सरिया
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सब्जियां बेचने के लिए नहीं बची जगह
निर्माण कार्य से आढ़ती और बागवान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी की ढली सब्जी मंडी में इन दिनों सीजन पीक पर चल रहा है। रोजाना हजारों बोरी सब्जियां मंडी में ऑक्शन के लिए पहुंचती हैं। लेकिन नई मंडी के निर्माण कार्य के चलते बोली लगाने के लिए आढ़तियों को जगह कम पड़ रही है। निर्माण कार्य के लिए सरिये और सीमेंट सहित अन्य सामान मंडी परिसर में रखा है। इसके चलते आढ़तियों और बगावानों को कारोबार करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मटर, फ्रासबीन और शिमला मिर्च की बोली तो ऑक्शन यार्ड के अंदर लगाई जाती है, लेकिन फूलगोभी की फसल को बाहर रखा जाता है। अब उस जगह पर निर्माण कार्य का सामान रखा है। एपीएमसी चेयरमैन देवानंद वर्मा ने बताया कि मंडी का निर्माण कार्य चलने की वजह से परिसर में सामान रखना पड़ा। इस दौरान फूलगोभी वाले आढ़तियों भट्ठाकुफर फल मंडी का विकल्प भी दिया है। बताया कि यदि मंडी में ज्यादा सब्जियां आ जाती हैं तो फूलगोभी वाले आढ़ती अस्थायी तौर पर भट्ठाकुफर फल मंडी में भी कुछ समय तक कार्य कर सकते हैं। बताया कि एक हफ्ते में गोभी की आपूर्ति घट जाएगी। ऐसे में कारोबार करने में जगह की कमी नहीं रहेगी।
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निर्माण कार्य से आढ़ती और बागवान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी की ढली सब्जी मंडी में इन दिनों सीजन पीक पर चल रहा है। रोजाना हजारों बोरी सब्जियां मंडी में ऑक्शन के लिए पहुंचती हैं। लेकिन नई मंडी के निर्माण कार्य के चलते बोली लगाने के लिए आढ़तियों को जगह कम पड़ रही है। निर्माण कार्य के लिए सरिये और सीमेंट सहित अन्य सामान मंडी परिसर में रखा है। इसके चलते आढ़तियों और बगावानों को कारोबार करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मटर, फ्रासबीन और शिमला मिर्च की बोली तो ऑक्शन यार्ड के अंदर लगाई जाती है, लेकिन फूलगोभी की फसल को बाहर रखा जाता है। अब उस जगह पर निर्माण कार्य का सामान रखा है। एपीएमसी चेयरमैन देवानंद वर्मा ने बताया कि मंडी का निर्माण कार्य चलने की वजह से परिसर में सामान रखना पड़ा। इस दौरान फूलगोभी वाले आढ़तियों भट्ठाकुफर फल मंडी का विकल्प भी दिया है। बताया कि यदि मंडी में ज्यादा सब्जियां आ जाती हैं तो फूलगोभी वाले आढ़ती अस्थायी तौर पर भट्ठाकुफर फल मंडी में भी कुछ समय तक कार्य कर सकते हैं। बताया कि एक हफ्ते में गोभी की आपूर्ति घट जाएगी। ऐसे में कारोबार करने में जगह की कमी नहीं रहेगी।
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