सीबीएसई पेपर लीक मामले में हिमाचल से तीन लोग गिरफ्तार, हो सकते हैं कई खुलासे
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सीबीएसई के बहुचर्चित पेपर लीक मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ऊना से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपी यहां स्थित डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल के कर्मचारी हैं। जिनमें से एक पीजीटी कॉमर्स, जबकि दूसरा क्लर्क तथा तीसरा आरोपी चपरासी के पद पर कार्यरत है। दिल्ली पुलिस की दो टीमों ने आधी रात को छापेमारी कर आरोपियों को उनके घरों से गिरफ्तार किया।
रोचक तो यह है कि इस कार्रवाई की स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी। दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई के बाद पुलिस हेडक्वार्टर को इसकी सूचना दी जिसके बाद ऊना स्थित एसपी कंट्रोल रूम में इसकी सूचना दी गई। बीते दिनों दसवीं और बारहवीं के गणित तथा अर्थशास्त्र के पेपर लीक होने के बाद इसे दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस द्वारा गठित दो टीमों ने रात को ऊना जिला के गांव जखेड़ा और नगर संतोषगढ़ में आरोपियों के घरों पर दबिश दी। सूत्रों के मुताबिक क्राइम ब्रांच की टीम ने तड़के लगभग तीन बजे ही आरोपियों को उनके घरों से उठा लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में टीम ने संतोषगढ़ निवासी राकेश शर्मा को उसके घर से उठाया। राकेश शर्मा डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल ऊना में बतौर पीजीटी कॉमर्स तैनात है जिसकी ड्यूटी सीबीएसई पेपर के चलते ऊना के ही पेखुवेला स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में लगी थी।
इस बार डीएवी नहीं था परीक्षा केंद्र
इसके अलावा टीम ने ऊना जिला के जखेड़ा गांव में दबिश देकर ऑफिस क्लर्क अमित शर्मा और चतुर्थ कर्मी अशोक कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद टीम ने स्कूल का रुख किया।
शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस की क्राम ब्रांच ने डीएवी स्कूल में संबंधित आरोपियों का रिकॉर्ड खंगाला और दस्तावेज अपने साथ ले गई। एसपी दिवाकर शर्मा ने बताया कि पुलिस हेडक्वार्टर की ओर से उन्हें सूचना मिली कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीबीएसई पेपर लीक मामले में जिला से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य अतुल महाजन ने कहा कि इस बार उनके स्कूल में सीबीएसई का कोई परीक्षा केंद्र नहीं थी और न ही वह परीक्षा में सुपरिंटेंडेंट थे।
उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सुबह के समय स्कूल पहुंच कर पीजीटी राकेश शर्मा तथा ऑफिस क्लर्क अमित शर्मा के बारे में जानकारी मांगी जो उन्हें उपलब्ध करवा दी गई।
प्रिंसीपल ने कहा कि उनके स्कूल के पीजीटी की जिस जेएनवी में ड्यूटी लगी थी वहां डीएवीसीपीए के बच्चों की परीक्षा नहीं थी। उन्होंने कहा डीएवी का प्रशासन जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।
हिमाचल में सीपीएमटी का पेपर भी हो चुका है लीक
हिमाचल में पहले भी पेपर लीक हो चुका है। इससे मुन्ना भाई एमबीबीएस फिल्म की तर्ज पर डॉक्टर बनाए जाने का खुलासा हुआ था। दिल्ली समेत बाहरी क्षेत्रों से आए कुछ दलालों ने पेपर लीक करने की एवज में कई अभ्यर्थियों से पैसे वसूले। इसके बाद लीक पेपर के सहारे दर्जनों अभ्यर्थी एमबीबीएस कोर्स के लिए चयनित भी हो गए थे।
इनमें कई रसूखदारों के बच्चे भी शामिल थे। यह घटना करीब 12 साल पहले सामने आई थी। प्रदेश में पेपर लीक का यह बड़ा मामला वर्ष 2006 के नवंबर महीने में सामने आया था। इस बहुचर्चित केस में पुलिस ने 119 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इनमें दर्जनों लोग गिरफ्तार किए गए।
बाद में 119 लोगों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश कर मुकदमा भी चला। मामले में 38 अभ्यर्थियों को गैर कानूनी तरीके से चयनित किया गया था। आरोप थे कि राज्य से बाहर के एक रैकेट ने पेपर लीक करवाकर 38 अभ्यर्थियों को सीपीएमटी में चयनित करवाने में मदद की। ये एमबीबीएस कोर्स के लिए चयनित कर लिए गए।
इनमें कई नेताओं, अधिकारियों समेत प्रभावशाली लोगो के बच्चे भी थे। हाईकोर्ट ने मामले की जांच के लिए डीआईजी की अध्यक्षता में एक विशेष जांच टीम का गठन किया था। इस मामले को शिमला के ही एक कोचिंग सेंटर से संबंधित लोगों ने पुलिस के ध्यान में लाया। शुरू में इस मामले में आनाकानी होती रही। बाद में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में कई खुलासे हुए।