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Shimla News: कैंसर के मरीजों को जांच के लिए जाना पड़ रहा चमियाना अस्पताल
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कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी के विशेषज्ञों से सलाह लेने के लिए करना पड़ रहा 9 किमी का सफर
कैंसर अस्पताल में दाखिल मरीजों का दर्द बढ़ा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के टर्शरी कैंसर सेंटर (अस्पताल) में दर्द से कराहते मरीजों को सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिए चमियाना जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही है।
कैंसर अस्पताल में दाखिल मरीजों को कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी के विशेषज्ञों से सलाह लेनी हो तो उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यह विभाग आईजीएमसी से चमियाना अस्पताल शिफ्ट कर दिए हैं। ऐसे में इन रोगों की जांच करवाने के लिए कैंसर मरीजों को आईजीएमसी से नौ किलोमीटर दूर चमियाना जाना पड़ता है। इन विभागों के आईजीएमसी से चमियाना शिफ्ट होने के बाद से मरीजों की परेशानी बढ़ी है। इसके अलावा यदि किसी मरीज को हृदय संबंधी परेशानी हो जाए तो उसे ईको टेस्ट करवाने के लिए भी चमियाना जाना पड़ता है। टर्शरी कैंसर सेंटर (अस्पताल) आईजीएमसी में ईको टेस्ट की सुविधा नहीं है। वहीं जांच के लिए भी विशेषज्ञ चिकित्सक कभी-कभार ही कैंसर सेंटर आते हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
कई बार उन्हें जांच के लिए इंतजार भी करना पड़ता है। आपात स्थिति में मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि ऐसे मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। पहले मरीजों को आईजीएमसी में ही यह सुविधाएं मिल जाती थीं लेकिन विभागों के चमियाना शिफ्ट होने के बाद उनकी परेशानी दोगुनी हो गई है।
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कतार में खड़े होकर बनवानी पड़ती है पर्ची
कैंसर अस्पताल में भर्ती मरीजों को जांच के लिए चमियाना भेजने के बाद उन्हें दोबारा पर्ची बनवाने के लिए लाइनों में लगना पड़ता है। पर्ची बनवाने के बाद ओपीडी में टोकन के हिसाब से उनकी बारी आती है। इस पूरी प्रक्रिया में मरीजों का पूरा दिन लग जाता है। भर्ती मरीजों को अलग से कोई सुविधा चमियाना में नहीं दी गई है।
कोट
आईजीएमसी से विभागों के चमियाना शिफ्ट होने के बाद से यह परेशानी बढ़ी है। इस संबंध में सरकार के साथ पत्राचार किया है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के चिकित्सक वैकल्पिक दिनों में जांच के लिए आते हैं।
-डॉ. मनीष गुप्ता, विभागाध्यक्ष, टर्शरी कैंसर सेंटर, आईजीएमसी
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कैंसर अस्पताल में दाखिल मरीजों का दर्द बढ़ा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के टर्शरी कैंसर सेंटर (अस्पताल) में दर्द से कराहते मरीजों को सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिए चमियाना जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही है।
कैंसर अस्पताल में दाखिल मरीजों को कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी के विशेषज्ञों से सलाह लेनी हो तो उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यह विभाग आईजीएमसी से चमियाना अस्पताल शिफ्ट कर दिए हैं। ऐसे में इन रोगों की जांच करवाने के लिए कैंसर मरीजों को आईजीएमसी से नौ किलोमीटर दूर चमियाना जाना पड़ता है। इन विभागों के आईजीएमसी से चमियाना शिफ्ट होने के बाद से मरीजों की परेशानी बढ़ी है। इसके अलावा यदि किसी मरीज को हृदय संबंधी परेशानी हो जाए तो उसे ईको टेस्ट करवाने के लिए भी चमियाना जाना पड़ता है। टर्शरी कैंसर सेंटर (अस्पताल) आईजीएमसी में ईको टेस्ट की सुविधा नहीं है। वहीं जांच के लिए भी विशेषज्ञ चिकित्सक कभी-कभार ही कैंसर सेंटर आते हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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कई बार उन्हें जांच के लिए इंतजार भी करना पड़ता है। आपात स्थिति में मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि ऐसे मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। पहले मरीजों को आईजीएमसी में ही यह सुविधाएं मिल जाती थीं लेकिन विभागों के चमियाना शिफ्ट होने के बाद उनकी परेशानी दोगुनी हो गई है।
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कतार में खड़े होकर बनवानी पड़ती है पर्ची
कैंसर अस्पताल में भर्ती मरीजों को जांच के लिए चमियाना भेजने के बाद उन्हें दोबारा पर्ची बनवाने के लिए लाइनों में लगना पड़ता है। पर्ची बनवाने के बाद ओपीडी में टोकन के हिसाब से उनकी बारी आती है। इस पूरी प्रक्रिया में मरीजों का पूरा दिन लग जाता है। भर्ती मरीजों को अलग से कोई सुविधा चमियाना में नहीं दी गई है।
कोट
आईजीएमसी से विभागों के चमियाना शिफ्ट होने के बाद से यह परेशानी बढ़ी है। इस संबंध में सरकार के साथ पत्राचार किया है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के चिकित्सक वैकल्पिक दिनों में जांच के लिए आते हैं।
-डॉ. मनीष गुप्ता, विभागाध्यक्ष, टर्शरी कैंसर सेंटर, आईजीएमसी