केक काटकर मनाया मां ज्वाला का जन्मदिन, लगाए 56 तरह के भोग
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शक्तिपीठ ज्वालाजी मंदिर में आषाढ़ शुक्ल पक्ष के गुप्त नवरात्र में मां ज्वाला का प्रकटोत्सव जन्मदिवस के रूप में मनाया गया। हर साल की तरह पुजारियों ने देर रात मंदिर के बंद होने के बाद वैदिक मंत्रों से गुप्त पूजा-अर्चना की।
इस विधि में मां ज्वाला को 56 प्रकार के भोग लगाए गए और माता के नाम का केक भी काटा गया। मान्यता है कि मां ज्वाला इसी दिन इस स्थान पर ज्योति के रूप में प्रकट हुई थीं। विश्वशांति व जनकल्याण के लिए मां की पूजा आराधना हर वर्ष पुजारी व मंदिर न्यास द्वारा सामूहिक रूप से की जाती है।
देर रात पूजा-अर्चना पुजारियों के साथ आचार्य पुजारी नीलमणी कांत ने की। मंदिर में जाप व अनुष्ठान का समापन भी हवन, यज्ञ से किया गया। इसमें 71 पुजारियों व पंडितों ने भाग लिया।
कांगड़ी धाम भी परोसी
यज्ञ समापन पर पुजारी वर्ग व शहरवासियों ने पूर्णाहुति में भाग लिया जिसमें मंदिर अधिकारी जगदीश शर्मा, ट्रस्ट सदस्य पुजारी मधुसूदन शर्मा, प्रशांत शर्मा, सौरभ शर्मा, शैलेश शर्मा, कृष्ण स्वरूप, देशराज भारती, शशि चौधरी, त्रिलोक चौधरी, मंदिर सह अधिकारी अमित गुलेरी, कमलकांत, बलदेव व मनोहर आदि शामिल रहे।
पुजारी महासभा के प्रधान एवं मंदिर ट्रस्ट सदस्य प्रशांत शर्मा ने बताया कि मंदिर में शहरवासियों व श्रद्धालुओं को मंदिर न्यास की ओर से 100 किलो देसी घी के हलवे का प्रसाद भी बांटा गया। इस अवसर पर कन्या पूजन के बाद भंडारे का आयोजन किया। इसमें श्रद्धालुओं को कांगड़ी धाम परोसी गई और खीर का प्रसाद भी बांटा गया। भंडारे में देश विदेश से आए श्रद्धालुओं व स्थानीय निवासियों ने माता का प्रसाद ग्रहण किया। सहायक मंदिर आयुक्त एवं एसडीएम अंकुश शर्मा का कहना है कि मां ज्वाला के ‘प्रकटोत्सव’ के आयोजन में कोई कमी नहीं रखी गई।