पच्छाद उपचुनाव: भाजपा पर हैट्रिक तो कांग्रेस पर होगा वापसी का दबाव
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प्रथम मुख्यमंत्री एवं हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार के गृह विधानसभा क्षेत्र पच्छाद में होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। कांग्रेस का परंपरागत गढ़ माने जाने वाले पच्छाद में भाजपा पर हैट्रिक बनाने का दबाव है, तो कांग्रेस वापसी के लिए मैदान में उतरेगी। पिछले दो विस चुनावों में यहां लगातार भाजपा के सुरेश कश्यप विजयी हुए हैं। उनके लोकसभा चुनाव लड़ने से सीट खाली होने पर यहां 21 अक्तूबर को उपचुनाव होगा।
वर्ष 1951 में हिमाचल निर्माता एवं प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार ने पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। इसके बाद हुए चुनावों में यहां कांग्रेस का ही दबदबा रहा। कांग्रेस दस चुनावों में यहां विजयी हुई, जबकि वर्ष 2012 में कांग्रेस के इस परंपरागत किले में सेंधमारी कर भाजपा के सुरेश कश्यप ने जीत दर्ज की। वर्ष 2017 में हुए चुनाव में भी सुरेश कश्यप दोबारा जीते। इससे पहले वर्ष 1977 में जनता पार्टी के श्रीराम जख्मी जीते थे।
लेकिन, बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए। इस बार हो रहे उपचुनाव में यहां भाजपा पर जीत की हैट्रिक बनाने का दबाव रहेगा। लोकसभा चुनाव में भारी बढ़त के साथ अपने विधायक को केंद्र में भेजने वाली जनता उपचुनाव में क्या रंग दिखाएगी यह तो चुनाव नतीजे तय करेंगे। लेकिन, उपचुनाव की तिथि घोषित होते ही पच्छाद में सियासी पारा चढ़ गया है। सियासी घमासान के बीच कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है। शनिवार को चुनाव का एलान होते ही दोनों दल रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
कब कौन रहा विधायक
वर्ष विधायक पार्टी
1977 जख्मी राम जनता पार्टी
1982 गंगू राम मुसाफिर निर्दलीय
1985 गंगू राम मुसाफिर कांग्रेस
1990 गंगू राम मुसाफिर कांग्रेस
1993 गंगू राम मुसाफिर कांग्रेस
1998 गंगू राम मुसाफिर कांग्रेस
2003 गंगू राम मुसाफिर कांग्रेस
2007 गंगू राम मुसाफिर कांग्रेस
2012 सुरेश कश्यप भाजपा
2017 सुरेश कश्यप भाजपा
मुसाफिर के नाम जीत का रिकॉर्ड
पच्छाद में पूर्व विस अध्यक्ष गंगू राम मुसाफिर के नाम जीत का रिकॉर्ड है। वह वर्ष 1982 से लगातार सात बार यहां से विजयी हुए। वर्ष 2012 में कांग्रेस के इस परंपरागत गढ़ को भेदने में भाजपा को कामयाबी मिली। पच्छाद में भाजपा से सुरेश कश्यप ने यहां लगातार दो बार जीत दर्ज की। कांग्रेस उम्मीदवार गंगूराम मुसाफिर भले ही दो बार पराजित हुए, लेकिन वर्ष 2012 में मुसाफिर को जहां 22863 मत मिले थे, वहीं 2017 के चुनाव में उन्हें 23816 मत प्राप्त हुए थे।
1957 से 1967 तक रही टेरीटोरियल काउंसिल
पच्छाद में 13 बार हुए विधानसभा चुनावों की अवधि के दौरान 1957 से 1967 तक हिमाचल प्रदेश टेरीटोरियल काउंसिल रही। इसमें 1957 में कांग्रेस के जीत सिंह व मांगा राम सदस्य रहे। जबकि 1962 में एक ही अनुसूचित जाति सदस्य बने माता राम। वे भी कांग्रेस समर्थित थे।