उपचुनाव: टिकट के दावेदारों ने बढ़ाई भाजपा-कांग्रेस की धुकधुकी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टिकट की दौड़ में शामिल दावेदारों ने दोनों राजनीतिक दलों की धुकधुकी बढ़ा दी है। किसे टिकट देना है और किसे नहीं। इसको लेकर हाईकमान भी में असमंजस की स्थिति है। पैनल से बाहर चल रहे दावेदारों से पार्टियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। अभी भाजपा ने पच्छाद उपचुनाव के लिए तीन नामों का पैनल केंद्रीय संसदीय बोर्ड को भेजा है।
इसमें रीना कश्यप, बलदेव कश्यप और आशीष सिकटा नाम शामिल है। कांग्रेस से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगूराम मुसाफिर के अलावा बाबूराम और रतन कश्यप का नाम दावेदारों में शामिल है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए टिकट के लिए किसी एक के नाम पर सहमति बनाना काफी मुश्किल हो चला है। पच्छाद उपचुनाव में दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर होगी। दलों के लिए अंतर्कलह तथा भितरघात से पार पाना भी टेड़ीखीर साबित होगा।
कांग्रेस टिकट पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगूराम मुसाफिर के नाम का सबसे आगे चल रहा था। ब्लॉक कांग्रेस से भी मुसाफिर के नाम की सहमति बनी थी। ऐन वक्त पर दो अन्य दावेदारों ने टिकट को आवेदन कर दिया। एक दावेदार सराहां तो दूसरा राजगढ़ क्षेत्र से संबंध रखता है। भाजपा में भी पहले दयाल प्यारी प्रबल दावेदार मानी जा रही थीं।
वह एक बार जिला परिषद अध्यक्ष और दो बार सदस्य रही हैं। पैनल में उनका नाम शामिल न होने से भाजपा की डगर भी कठिन हो चली है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पच्छाद के भाजपा नेताओं से चल रही तकरार ने दयाल प्यारी को पैनल से बाहर का रास्ता दिखाया।
राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि दयाल प्यारी पर उनके समर्थनों का भारी दबाव है। हालांकि, वह अभी भी टिकट की दौड़ में शामिल बताई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि वह दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी से संपर्क में हैं। कांग्रेस के लिए भी चुनौतियां कम नहीं हैं। देखना यह है कि टिकट फाइनल होने के बाद दूसरे दावेदारों को दोनों दल मनाने में कामयाब होते हैं या फिर पच्छाद की राजनीति में टिकट के चाहवान भूचाल लाएंगे।