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Shimla News: चेक बाउंस मामले में कारोबारी को छह महीने का कारावास
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत का फैसला, निचली अदालत के फैसले को किया संशोधित
अदालत ने 2.75 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (सीबीआई कोर्ट) शिमला डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए शिमला निवासी अपीलकर्ता एवं दोषी आइरिश ग्रोवर की सजा कम कर दी है।
अब अभियुक्त को छह महीने के साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। साथ ही उसे शिकायतकर्ता को 2.75 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है। मुआवजा अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। शिमला निवासी शिकायतकर्ता डीएस जरेट ने 31 मार्च 2023 को निचली अदालत में धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार अगस्त 2014 में अपीलकर्ता एवं दोषी आइरिश ग्रोवर ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर इस भवन में 470 वर्गफीट की दुकान किराये पर ली थी।
बाद में किराये का बकाया और मासिक किराये के भुगतान के एवज में आइरिश ग्रोवर ने दिसंबर 2022 और जनवरी 2023 के लिए अलग-अलग राशि के चार चेक जारी किए। बैंक में लगाए जाने पर खाते में पर्याप्त राशि न होने से सभी चेक बाउंस हो गए।
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निचली अदालत ने 13 नवंबर 2025 को आरोपी को दोषी करार देते हुए डेढ़ वर्ष यानी एक साल छह महीने के साधारण कारावास और चेक राशि से दोगुनी 3,92,788 रुपये की राशि बतौर जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि चेक बाउंस होने का अपराध सिद्ध होता है। मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने निचली अदालत की ओर से दी सजा को अधिक माना और उसे घटाकर छह महीने के साधारण कारावास में बदल दिया। इसके अलावा जुर्माना राशि को भी घटाकर 2.75 लाख कर दी।
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अदालत ने 2.75 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (सीबीआई कोर्ट) शिमला डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए शिमला निवासी अपीलकर्ता एवं दोषी आइरिश ग्रोवर की सजा कम कर दी है।
अब अभियुक्त को छह महीने के साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। साथ ही उसे शिकायतकर्ता को 2.75 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है। मुआवजा अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। शिमला निवासी शिकायतकर्ता डीएस जरेट ने 31 मार्च 2023 को निचली अदालत में धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार अगस्त 2014 में अपीलकर्ता एवं दोषी आइरिश ग्रोवर ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर इस भवन में 470 वर्गफीट की दुकान किराये पर ली थी।
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बाद में किराये का बकाया और मासिक किराये के भुगतान के एवज में आइरिश ग्रोवर ने दिसंबर 2022 और जनवरी 2023 के लिए अलग-अलग राशि के चार चेक जारी किए। बैंक में लगाए जाने पर खाते में पर्याप्त राशि न होने से सभी चेक बाउंस हो गए।
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निचली अदालत ने 13 नवंबर 2025 को आरोपी को दोषी करार देते हुए डेढ़ वर्ष यानी एक साल छह महीने के साधारण कारावास और चेक राशि से दोगुनी 3,92,788 रुपये की राशि बतौर जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि चेक बाउंस होने का अपराध सिद्ध होता है। मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने निचली अदालत की ओर से दी सजा को अधिक माना और उसे घटाकर छह महीने के साधारण कारावास में बदल दिया। इसके अलावा जुर्माना राशि को भी घटाकर 2.75 लाख कर दी।