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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal High Court: No time limit applies to reclaiming mortgaged land.

हिमाचल हाईकोर्ट: गिरवी रखी जमीन को वापस पाने के लिए कोई समयसीमा लागू नहीं होती

Sat, 26 Sep 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 26 Sep 2026 05:00 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि जब तक कर्ज का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक मूल मालिक या उसके वारिसों का अधिकार गिरवी रखी भूमि पर बना रहता है। 30 साल बीत जाने के आधार पर भूमि को अपने पास गिरवी रखने वाला व्यक्ति खुद को जमीन का पक्का मालिक घोषित नहीं कर सकता। 

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Himachal High Court: No time limit applies to reclaiming mortgaged land.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गिरवी रखी गई जमीन को वापस पाने के लिए कोई समयसीमा लागू नहीं होती। कोर्ट ने कहा कि जब तक कर्ज का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक मूल मालिक या उसके वारिसों का अधिकार गिरवी रखी भूमि पर बना रहता है। 30 साल बीत जाने के आधार पर भूमि को अपने पास गिरवी रखने वाला व्यक्ति खुद को जमीन का पक्का मालिक घोषित नहीं कर सकता। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने कसौली और सोलन की निचली अदालतों के फैसलों के खिलाफ दायर दो अपीलों का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया है।

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उल्लेखनीय है कि यह विवाद साल 1953 से जुड़ा है, जब लक्ष्मी नामक महिला ने अपनी करीब 19 बीघा जमीन एक व्यक्ति के पास गिरवी रखी थी। गिरवी रखने वाले के वारिसों ने सिविल कोर्ट में दावा किया था कि चूंकि 30 साल की समय सीमा (30 अप्रैल 1983 तक) के भीतर मूल मालिक ने पैसा लौटाकर जमीन वापस नहीं ली, इसलिए समय बीत जाने के नियम के तहत वे अब इस जमीन के पूर्ण मालिक बन चुके हैं। कसौली की ट्रायल कोर्ट ने गिरवी रखने वालों के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन जिला जज सोलन (अपीलीय अदालत) ने इस फैसले को पलट दिया।

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अपीलीय अदालत ने कहा था कि हिमाचल प्रदेश ऋण न्यूनीकरण अधिनियम, 1976 के तहत कृषि भूमि की कुर्की या पूर्ण जब्ती पर पूरी तरह रोक है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि उपयोग के साथ गिरवी भूमि पर कब्जा तब तक गिरवी रखने वाले के पास रहता है, जब तक कर्ज की राशि चुकता न हो जाए। इसमें मियाद खत्म होने का कोई नियम लागू नहीं होता। हाईकोर्ट ने प्रथम अपीलीय अदालत (सोलन कोर्ट) के आदेश को बरकरार रखा।

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