{"_id":"69930ced8341ac8d68025f05","slug":"buses-stopped-on-sanjauli-dhali-bypass-school-children-and-people-troubled-shimla-news-c-19-sml1002-678498-2026-02-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: संजौली-ढली बाईपास पर बसें बंद, स्कूली बच्चे, और लोगों परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: संजौली-ढली बाईपास पर बसें बंद, स्कूली बच्चे, और लोगों परेशान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्थानीय लोगों का दावा, बाईपास पर दौड़ रहे फोरलेन कंपनी के ट्राले और सरकारी वाहन, सिर्फ बसों की आवाजाही बंद
लोगों ने वाया ढली चलौंठी तक बसें चलाने की रखी मांग, स्कूल खुलने के बाद बढ़ी आवाजाही
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। संजौली-ढली बाईपास सड़क पर बसों की आवाजाही बंद होने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर में स्कूल खुलने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। इलाके के लोगों और स्कूली बच्चों को पैदल ही संजौली पहुंचना पड़ रहा है।
जिला प्रशासन शिमला ने चलौंठी के पास बाईपास सड़क पर आई दरारों के बाद यहां सभी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फोरलेन का निर्माण कर रही कंपनी के बड़े-बड़े ट्राले और अन्य सरकारी वाहन इस सड़क से गुजर रहे हैं। पाबंदी के नाम पर केवल बसों की आवाजाही बंद की गई है, जिससे आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
लोगों का कहना है कि रोजाना हजारों लोग और स्कूली बच्चे चलौंठी, रेस्ट हाउस और लंबीधार क्षेत्र से ढली या संजौली के लिए आवाजाही करते हैं। उनका सुझाव है कि वाया ढली या संजौली कॉलेज की ओर से चलौंठी तक बसें चलाई जा सकती हैं। जब तक सड़क पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती, तब तक कम से कम चलौंठी तक बस सेवा बहाल की जाए।
विज्ञापन
बसों की आवाजाही बंद होने से न केवल लोगों का समय अधिक लग रहा है, बल्कि खर्च भी बढ़ गया है। सामान ढोने के लिए मजदूर बुलाने पड़ रहे हैं। स्कूल खुलने के बाद अभिभावकों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। बच्चों को छोड़ने के लिए संजौली या ढली जाना पड़ रहा है। इसमें अतिरिक्त समय लग रहा है। लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि फोरलेन निर्माण में लगे ट्राले, छोटे वाहन, नगर निगम की कूड़ा गाड़ी और दमकल विभाग के आपातकालीन वाहन इस सड़क पर चल रहे हैं, लेकिन बसों पर पूरी तरह पाबंदी है।
सामान के लिए बुलाने पड़ रहे मजदूर
अपर चलौंठी निवासी सुषमा चौहान ने बताया कि बाईपास बंद होने के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बस पकड़ने के लिए संजौली या ढली जाना पड़ रहा है। उन्हें अपने गांव कोटखाई जाना है। सामान ले जाने के लिए अब ढली तक मजदूर बुलाने पड़ रहे हैं।
एक माह से बाईपास नहीं खोल पाए
लंबीधार निवासी शैलेंद्र चौहान ने कहा कि प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में सड़कें बहाल हो चुकी हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन संजौली-ढली बाईपास को एक माह बाद भी बसों के लिए बहाल नहीं कर पाया है। बसें बंद हैं, जबकि फोरलेन के बड़े ट्राले सड़क पर दौड़ रहे हैं। इससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल जाने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने मांग की कि या तो जल्द बसें चलाई जाएं या छोटी टैक्सियों और मिनी बसों की अनुमति दी जाए।
बसें बंद होने से कारोबार पर असर
होटल कारोबारी भूप सिंह ने कहा कि सड़क बंद होने से होटल कारोबार प्रभावित हो रहा है। पर्यटकों की गाड़ियां यहां तक नहीं पहुंच पा रही हैं। सड़क की हालत खराब है और धूल के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। उन्होंने जल्द बसों की आवाजाही बहाल करने की मांग की।
विज्ञापन
लोगों ने वाया ढली चलौंठी तक बसें चलाने की रखी मांग, स्कूल खुलने के बाद बढ़ी आवाजाही
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। संजौली-ढली बाईपास सड़क पर बसों की आवाजाही बंद होने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर में स्कूल खुलने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। इलाके के लोगों और स्कूली बच्चों को पैदल ही संजौली पहुंचना पड़ रहा है।
जिला प्रशासन शिमला ने चलौंठी के पास बाईपास सड़क पर आई दरारों के बाद यहां सभी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फोरलेन का निर्माण कर रही कंपनी के बड़े-बड़े ट्राले और अन्य सरकारी वाहन इस सड़क से गुजर रहे हैं। पाबंदी के नाम पर केवल बसों की आवाजाही बंद की गई है, जिससे आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
विज्ञापन
लोगों का कहना है कि रोजाना हजारों लोग और स्कूली बच्चे चलौंठी, रेस्ट हाउस और लंबीधार क्षेत्र से ढली या संजौली के लिए आवाजाही करते हैं। उनका सुझाव है कि वाया ढली या संजौली कॉलेज की ओर से चलौंठी तक बसें चलाई जा सकती हैं। जब तक सड़क पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती, तब तक कम से कम चलौंठी तक बस सेवा बहाल की जाए।
विज्ञापन
बसों की आवाजाही बंद होने से न केवल लोगों का समय अधिक लग रहा है, बल्कि खर्च भी बढ़ गया है। सामान ढोने के लिए मजदूर बुलाने पड़ रहे हैं। स्कूल खुलने के बाद अभिभावकों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। बच्चों को छोड़ने के लिए संजौली या ढली जाना पड़ रहा है। इसमें अतिरिक्त समय लग रहा है। लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि फोरलेन निर्माण में लगे ट्राले, छोटे वाहन, नगर निगम की कूड़ा गाड़ी और दमकल विभाग के आपातकालीन वाहन इस सड़क पर चल रहे हैं, लेकिन बसों पर पूरी तरह पाबंदी है।
सामान के लिए बुलाने पड़ रहे मजदूर
अपर चलौंठी निवासी सुषमा चौहान ने बताया कि बाईपास बंद होने के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बस पकड़ने के लिए संजौली या ढली जाना पड़ रहा है। उन्हें अपने गांव कोटखाई जाना है। सामान ले जाने के लिए अब ढली तक मजदूर बुलाने पड़ रहे हैं।
एक माह से बाईपास नहीं खोल पाए
लंबीधार निवासी शैलेंद्र चौहान ने कहा कि प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में सड़कें बहाल हो चुकी हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन संजौली-ढली बाईपास को एक माह बाद भी बसों के लिए बहाल नहीं कर पाया है। बसें बंद हैं, जबकि फोरलेन के बड़े ट्राले सड़क पर दौड़ रहे हैं। इससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल जाने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने मांग की कि या तो जल्द बसें चलाई जाएं या छोटी टैक्सियों और मिनी बसों की अनुमति दी जाए।
बसें बंद होने से कारोबार पर असर
होटल कारोबारी भूप सिंह ने कहा कि सड़क बंद होने से होटल कारोबार प्रभावित हो रहा है। पर्यटकों की गाड़ियां यहां तक नहीं पहुंच पा रही हैं। सड़क की हालत खराब है और धूल के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। उन्होंने जल्द बसों की आवाजाही बहाल करने की मांग की।