स्मार्ट बिजली मीटरों का डेढ़ साल में दोगुना बढ़ा बजट, जांच शुरू
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हिमाचल के दो स्मार्ट शहरों राजधानी शिमला और धर्मशाला में लगाए जाने वाले स्मार्ट बिजली मीटरों का डेढ़ साल में बजट दोगुना बढ़ गया है। 65 से 120 करोड़ बजट पहुंचने से अफसरशाही में हड़कंप है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा रामसुभग सिंह ने मामले पर जांच बैठा दी है। उन्होंने कहा कि मीटर लगने के बाद किसी तरह के सवाल न उठें, इसलिए जांच का फैसला लिया है। अन्य राज्यों में लगे स्मार्ट मीटरों की कीमतें जांचने में अधिकारी जुटे हैं।
पहले चरण में शिमला और धर्मशाला में डेढ़ लाख स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाने हैं। करीब डेढ़ साल पहले जब मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो योजना पर करीब 65 करोड़ का खर्च प्रारंभिक तौर पर आंका गया। डेढ़ साल के दौरान कई कारणों के चलते मीटर लगाने में देरी हुई। अब डेढ़ लाख मीटर लगाने का खर्च करीब 120 करोड़ तक पहुंच गया है। अब मीटर लगाने को चुनी गई कंपनी द्वारा अन्य राज्यों में जहां-जहां काम किया गया है, वहां की कीमतों को जांचने का फैसला लिया गया है।
पूरे प्रदेश में लगाए जाने हैं स्मार्ट बिजली मीटर
स्मार्ट बिजली मीटरों को पूरे प्रदेश में लगाया जाना है। स्मार्ट मीटर लगाने के बाद उपभोक्ताओं को एक मोबाइल एप्लीकेशन अपने फोन पर डाउनलोड करनी होगी। इस एप की मदद से बिजली खपत की पूरी निगरानी हो जाएगी। एप के जरिये उपभोक्ता किसी भी समय यह जान सकेगा कि उसने अब तक कितनी बिजली खपत की है। रीडिंग लेने के लिए भी कर्मचारियों को उपभोक्ता के घर जाने की जरूरत नहीं होगी।
लो वोल्टेज, बिजली बंद होने और बिजली चोरी करने की सूरत में कंट्रोल रूम में अपने आप जानकारी पहुंच जाएगी। यह मीटर इंटरनेट के माध्यम से कंट्रोल रूम से जुड़े रहेंगे। स्मार्ट मीटर को उपभोक्ता प्रीपेड मीटर के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकेंगे। प्रीपेड मीटर मोबाइल फोन की तरह रिचार्ज हो सकेंगे। बिल जमा करवाने का विकल्प भी उपभोक्ताओं को मिलेगा।