रोहतांग दर्रा यातायात के लिए बहाल, लाहौल में फंसे वाहन निकले
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सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने चार दिन कड़ी मशक्कत के बाद छह फीट तक ऊंची बर्फ की दीवार को काटकर रोहतांग दर्रा यातायात के लिए बहाल कर दिया है। पिछले हफ्ते भारी बर्फबारी से बंद दर्रे के बहाल होने के बाद लाहौल में फंसे सैकड़ों वाहनों को निकाला गया है।
बीते बुधवार को 150 वाहनों में करीब 400 लोग रोहतांग दर्रा से गुजरे। वहीं, वीरवार को हवा से मनाली-रोहतांग मार्ग पर कुछ जगह बर्फ की चादर बिछ गई जिससे यहां करीब 30 वाहन फंस गए। करीब तीन घंटों के बाद इन वाहनों को निकाला जा सका।
मनाली से लाहौल की तरफ जा रहे वाहनों को भी मढ़ी में रोक दिया गया। इन्हें वीरवार दोपहर करीब तीन बजे भेजा गया। उल्लेखनीय है कि बीते 2 से 5 नवंबर को हुई भारी बर्फबारी से समूची लाहौल घाटी में जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है।
सैकड़ों बड़े और छोटे वाहन केलांग से कोकसर तक फंसे हुए थे। बुधवार को 94 और 70 आरसीसी के अधिकारियों, जवानों और मशीन के चालकों ने रोहतांग दर्रा यातायात के लिए बहाल किया।
बीआरओ का आभार जताया
बुधवार को सेना के 35 ट्रक पलचान पहुंचे। वहीं, दोपहर बाद 3 बजे अन्य 115 के करीब छोटे-बड़े वाहन और दो एचआरटीसी बसें सहित सैकड़ों लोगों ने रोहतांग दर्रा पार किया। वीरवार को वाहनों की आवाजाही का सिलसिला शुरू हुआ।
लेकिन रोहतांग के समीप हवा से सड़क पर बर्फ की चादर बिछ गई। जिससे वाहन फंस गए। टैक्सी चालकों ने खुद सड़क से बर्फ हटाने का काम शुरू किया। इस बीच बीआरओ की मशीनरी भी मौके पर पहुंची और राहत दी।
सिस्सू चौकी में तैनात हैड कांस्टेबल शमिंद्र ने बताया कि यातायात बहाल होने पर पहले आर्मी की कानवाई और बाद में बाकी फंसे वाहनों को भेजा गया। बीआरओ के इंजीनियर राजेश ने बताया कि बुधवार को चार से छह फीट की ऊंची बर्फ की दीवार को काटकर
चार किलोमीटर लंबे दायरे से बर्फ हटाकर यातायात बहाल किया है। कोकसर पंचायत की प्रधान अंजू देवी, सिस्सू की प्रधान सुमन, गोंधला की प्रधान संगीता और खंगसर की प्रधान छेरिंग डोलमा ने शून्य से नीचे तापमान पर बीआरओ को रोहतांग दर्रा खोलने पर आभार जताया है।