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हिमाचल: ब्रजेश सिंह बोले- आलू की 90 फीसदी किस्में सीपीआरआई ने की विकसित
Wed, 10 Jan 2024 07:00 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 10 Jan 2024 07:00 PM IST
सार
आलू की रोग मुक्त और पौष्टिक किस्में विकसित करना सीपीआरआई की उपलब्धि है। भारत में आलू की प्रोसेसिंग में हर साल 10 फीसदी की वृद्धि हो रही है।
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सीपीआरआई में शैक्षणिक भ्रमण के लिए पहुंचे इंटीग्रल विश्वविद्यालय लखनऊ के विद्यार्थी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश में विकसित हुई आलू की 90 फीसदी किस्में सीपीआरआई ने विकसित की हैं। नई किस्म विकसित करने में 10 से 12 साल लग जाते हैं। भारत में आलू करीब 400 साल पहले आया बावजूद इसके आलू उत्पादन में आज भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। आलू की रोग मुक्त और पौष्टिक किस्में विकसित करना सीपीआरआई की उपलब्धि है। भारत में आलू की प्रोसेसिंग में हर साल 10 फीसदी की वृद्धि हो रही है। प्रोसेसिंग के बाद तैयार होने वाले आलू के उत्पाद भारत से विदेशों को निर्यात हो रहे हैं जिससे देश को विदेशी मुद्रा मिल रही है। देश में आलू का उत्पादन 15 सालों में दोगुना हो गया है।
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बुधवार को सीपीआरआई में शैक्षणिक भ्रमण के लिए पहुंचे इंटीग्रल विश्वविद्यालय लखनऊ के छात्रों को संबोधित करते हुए यह जानकारी संस्थान के निदेशक डाॅ. ब्रजेश सिंह ने दी। सीपीआरआई के सामाजिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डाॅ. आलोक कुमार ने बताया कि छात्रों को संस्थान में इस्तेमाल हो रही टैक्नालॉजी की जानकारी दी गई। संस्थान का म्यूजियम और प्रयोगशाला भी दिखाई गई। इंटीग्रल विश्वविद्यालय लखनऊ के ग्रुप कार्डिनेटर डाॅ. मुहम्मद अशफाक ने बताया कि सीपीआरआई में छात्रों को आलू की किस्में विकसित करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
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