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अपराधी हो जाएं सावधान, झूठ बोलकर बच निकलना अब नहीं आसान

Tue, 06 Jun 2017 02:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 06 Jun 2017 02:01 PM IST
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Brain Mapping Machine to tackle criminals Forensic Science Laboratory Junga Himachal Pradesh

अपराध करने के बाद झूठ बोलकर बच निकलना अब आसान नहीं रहेगा। हिमाचल सरकार शिमला के जुन्गा स्थित फोरेंसिक साइंस लैब को जल्द ही ब्रेन मैपिंग मशीन से लैस करने जा रही है। सरकार पहले ही इस विंग को गठित करने के लिए पद सृजित कर चुकी है।

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चूंकि करीब डेढ़ करोड़ से इस मशीन की खरीद होनी है, ऐसे में गृह विभाग सारी औपचारिकताएं पूरी कर खरीद की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की कवायद में लगा है। इसके साथ ही लैब में लेयर्ड वाइस एनालिसिस और सस्पेक्ट डिटेक्शन सिस्टम भी स्थापित किया जाना है।
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लैब निदेशक अरुण शर्मा ने बताया कि इसके लिए सरकार ने पहले ही पद सृजित कर दिए हैं और इन्हें भरने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। शर्मा ने बताया कि गुजरात के बाद हिमाचल दूसरा ऐसा प्रदेश होगा जहां ब्रेन मैपिंग की सुविधा होगी। इससे पहले कर्नाटक और महाराष्ट्र में यह टेस्ट शुरू किया गया लेकिन बाद में बंद हो गया। 

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गुजरात के बाद ब्रेन मैपिंग सहूलियत वाला हिमाचल होगा दूसरा राज्य

Brain Mapping Machine to tackle criminals Forensic Science Laboratory Junga Himachal Pradesh

बताया कि इस विधा के जरिये मिलने वाली जानकारी को क्राइम सीन की जानकारी के साथ मिलाकर आरोपी के झूठ या सच बोलने और जांच की दिशा तय करने में मदद मिलती है। आरोपी के दिमाग की हलचल को रिकार्ड किया जाता है। 

साथ ही देखा जाता है कि क्राइम सीन या अपराध की जानकारी पर उसका दिमाग किस तरह प्रतिक्रिया करता है। कंप्यूटराइज्ड प्रक्रिया के तहत इस जानकारी को दर्ज कर वैज्ञानिक किसी नतीजे पर पहुंचते हैं। शर्मा ने बताया कि अभी जांच के लिए करीब साठ हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। 

इस जांच को कराने के लिए करीब साठ हजार रुपये अभी पचास से साठ हजार रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। चूंकि हिमाचल में होने वाले अपराधों की जांच में कई बार ब्रेन मैपिंग की जरूरत महसूस की जाती रही है। जिसकी वजह से कई मामलों में संदिग्ध को गुजरात भेजना पड़ता है। 

इसमें आने जाने व रहने का भी खर्च सरकार को वहन करना पड़ता है। ऐसे में प्रयास है कि हिमाचल में ऐसी सुविधा होने से आसपास के प्रदेशों के मामलों की जांच के लिए वहां की पुलिस संपर्क कर सकेंगी। साथ ही हिमाचल में विवेचना की गुणवत्ता में भी वृद्घि होगी।

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