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बीपीएल कार्ड बनाने में फंसा आय सीमा का पेच
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35 हजार या इससे कम वार्षिक आय वालों के ही बनेंगे बीपीएल कार्ड
तहसीलदार पटवारी तो पटवारी लोगों भेज रहा पार्षदों के पास
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड बनाने में नया पेच फंस गया है। यह कार्ड बनाने के लिए अनिवार्य आय प्रमाणपत्र के लिए लोगों को अब तहसीलदार और पटवारी से लेकर पार्षद तक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
ज्यादातर लोगों को चक्कर काटने के बावजूद आय का प्रमाणपत्र नहीं मिल रहा। निगम प्रशासन के अनुसार बीपीएल कार्ड बनाने के लिए आय का प्रमाणपत्र लाना अनिवार्य है। इसमें जिन परिवारों की वार्षिक आय 35 हजार या इससे कम है, उन्हें ही बीपीएल कार्ड की सुविधा मिलेगी। यह आय प्रमाणपत्र तहसीलदार जारी करेगा। वहीं तहसीलदार लोगों को पहले पटवारी के पास भेज रहे हैं। पटवारी की रिपोर्ट पर ही तहसीलदार आय प्रमाणपत्र जारी करेगा। इसके बाद जब लोग पटवारी के पास पहुंच रहे हैं तो यहां से इन्हें वार्ड पार्षद के पास भेजा जा रहा है। पटवारी पार्षदों से आय की रिपोर्ट मांग रहे हैं, लेकिन नियमानुसार पार्षद आय संबंधी रिपोर्ट देने के लिए अधिकृत ही नहीं है। पार्षद संबंधित व्यक्ति के स्थायी पत्ते आदि की जानकारी को तो वेरिफाई कर सकते हैं, लेकिन यह आय की रिपोर्ट नहीं दे सकते। ऐसे में अधिकतर वार्डों में गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड का काम लगभग ठप हो गया है।
शिमला में कमरे ही तीन हजार के, कैसे दें प्रमाण पत्र
साल 2007 के सर्वे के मुताबिक 35 हजार या इससे कम वार्षिक आय वाले लोगों को ही बीपीएल के लिए आय प्रमाण पत्र मिलना है। लेकिन शिमला जैसे महंगे शहर में तीन हजार रुपये से भी कम मासिक खर्च पर गुजारा करना मुश्किल है। कई लोग पार्षदों के पास जाकर 35 हजार से कम आय की रिपोर्ट देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन जब पार्षद इनसे पूछताछ करते हैं तो पता चल रहा है कि इनमें से कई लोग तो कमरे का किराया ही हर महीने तीन हजार रुपये से ज्यादा दे रहे हैं। ऐसे में इनकी आय कम कैसे लिखी जाए। पार्षद सुनील धर, राकेश चौहान, पूरनमल ने कहा कि आय की रिपोर्ट पार्षद नहीं दे सकते। पार्षद सिर्फ यह वेरिफाई करेगा कि उक्त आवेदनकर्ता उसके वार्ड में रहता है या नहीं। आय प्रमाण पत्र जारी करना तहसीलदार और पटवारी का काम है, लेकिन पटवारी पार्षदों पर यह काम थोप रहे हैं। कहा कि सर्वे काफी पुराना है। न्यूनतम आय सीमा का दोबारा निर्धारण होना चाहिए था। शिमला जैसे शहर में यदि यह आय सीमा रहती है तो इक्का दुक्का लोग ही बीपीएल श्रेणी में शामिल होंगे।
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शहर में बनने हैं 3050 बीपीएल कार्ड
शहर में कुल 3050 गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड बनने हैं। साल 2007 के सर्वे के अनुसार शहर में 2512 परिवारों के बीपीएल कार्ड बने हैं। अब इनमें से कई अपात्र परिवार बाहर होंगे जबकि नए गरीब परिवार शामिल होंगे। बीपीएल कार्ड के लिए आय प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और राशनकार्ड आदि दस्तावेज आवेदन के साथ लगाने जरूरी हैं।
तहसीलदार ही जारी करेंगे प्रमाणपत्र
नगर निगम आयुक्त आशीष कोहली ने कहा कि आय प्रमाणपत्र तहसीलदार ही जारी करेगा। पार्षद अपनी ओर से आय का प्रमाणपत्र नहीं दे सकते, जिनकी आय तय सीमा से कम होगी, उन्हें ही इस सूची में शामिल किया जाएगा।
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तहसीलदार पटवारी तो पटवारी लोगों भेज रहा पार्षदों के पास
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड बनाने में नया पेच फंस गया है। यह कार्ड बनाने के लिए अनिवार्य आय प्रमाणपत्र के लिए लोगों को अब तहसीलदार और पटवारी से लेकर पार्षद तक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
ज्यादातर लोगों को चक्कर काटने के बावजूद आय का प्रमाणपत्र नहीं मिल रहा। निगम प्रशासन के अनुसार बीपीएल कार्ड बनाने के लिए आय का प्रमाणपत्र लाना अनिवार्य है। इसमें जिन परिवारों की वार्षिक आय 35 हजार या इससे कम है, उन्हें ही बीपीएल कार्ड की सुविधा मिलेगी। यह आय प्रमाणपत्र तहसीलदार जारी करेगा। वहीं तहसीलदार लोगों को पहले पटवारी के पास भेज रहे हैं। पटवारी की रिपोर्ट पर ही तहसीलदार आय प्रमाणपत्र जारी करेगा। इसके बाद जब लोग पटवारी के पास पहुंच रहे हैं तो यहां से इन्हें वार्ड पार्षद के पास भेजा जा रहा है। पटवारी पार्षदों से आय की रिपोर्ट मांग रहे हैं, लेकिन नियमानुसार पार्षद आय संबंधी रिपोर्ट देने के लिए अधिकृत ही नहीं है। पार्षद संबंधित व्यक्ति के स्थायी पत्ते आदि की जानकारी को तो वेरिफाई कर सकते हैं, लेकिन यह आय की रिपोर्ट नहीं दे सकते। ऐसे में अधिकतर वार्डों में गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड का काम लगभग ठप हो गया है।
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शिमला में कमरे ही तीन हजार के, कैसे दें प्रमाण पत्र
साल 2007 के सर्वे के मुताबिक 35 हजार या इससे कम वार्षिक आय वाले लोगों को ही बीपीएल के लिए आय प्रमाण पत्र मिलना है। लेकिन शिमला जैसे महंगे शहर में तीन हजार रुपये से भी कम मासिक खर्च पर गुजारा करना मुश्किल है। कई लोग पार्षदों के पास जाकर 35 हजार से कम आय की रिपोर्ट देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन जब पार्षद इनसे पूछताछ करते हैं तो पता चल रहा है कि इनमें से कई लोग तो कमरे का किराया ही हर महीने तीन हजार रुपये से ज्यादा दे रहे हैं। ऐसे में इनकी आय कम कैसे लिखी जाए। पार्षद सुनील धर, राकेश चौहान, पूरनमल ने कहा कि आय की रिपोर्ट पार्षद नहीं दे सकते। पार्षद सिर्फ यह वेरिफाई करेगा कि उक्त आवेदनकर्ता उसके वार्ड में रहता है या नहीं। आय प्रमाण पत्र जारी करना तहसीलदार और पटवारी का काम है, लेकिन पटवारी पार्षदों पर यह काम थोप रहे हैं। कहा कि सर्वे काफी पुराना है। न्यूनतम आय सीमा का दोबारा निर्धारण होना चाहिए था। शिमला जैसे शहर में यदि यह आय सीमा रहती है तो इक्का दुक्का लोग ही बीपीएल श्रेणी में शामिल होंगे।
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शहर में बनने हैं 3050 बीपीएल कार्ड
शहर में कुल 3050 गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड बनने हैं। साल 2007 के सर्वे के अनुसार शहर में 2512 परिवारों के बीपीएल कार्ड बने हैं। अब इनमें से कई अपात्र परिवार बाहर होंगे जबकि नए गरीब परिवार शामिल होंगे। बीपीएल कार्ड के लिए आय प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और राशनकार्ड आदि दस्तावेज आवेदन के साथ लगाने जरूरी हैं।
तहसीलदार ही जारी करेंगे प्रमाणपत्र
नगर निगम आयुक्त आशीष कोहली ने कहा कि आय प्रमाणपत्र तहसीलदार ही जारी करेगा। पार्षद अपनी ओर से आय का प्रमाणपत्र नहीं दे सकते, जिनकी आय तय सीमा से कम होगी, उन्हें ही इस सूची में शामिल किया जाएगा।