स्टोर में खराब नहीं होंगी दवाइयां, रहेगी निगरानी
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हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों के दवा स्टोरों में एक्सपायर हो चुकी और एक्सपायर होने वाली दवाओं के मामले पर स्वास्थ्य महकमा हरकत में आ गया है। ‘अमर उजाला’ ने शिमला और चिंतपूर्णी में हो रही गड़बड़ियों के मामले को प्रमुखता से उठाया है।
11 फरवरी के अंक में ‘मुफ्त बंट रही खराब होने वाली दवाएं’ शीर्षक से राजधानी शिमला स्थित दीनदयाल उपाध्याय (रिपन) अस्पताल में फरवरी महीने में ही एक्सपायर होने वाली दवाओं को मरीजों को देने का मामला उठाया था।
13 फरवरी को ‘स्टोर में ही एक्सपायर हो गईं लाखों की दवाएं’ शीर्षक से जिला ऊना के चिंतपूर्णी अस्पताल में लाखों की जीवनरक्षक दवाओं के स्टोर में रखे हुए ही एक्सपायर होने का मामला उठाया था।
खबरें प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य निदेशालय ने संज्ञान लेते हुए सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, चिकित्सा अधीक्षकों को आदेश जारी कर दवा स्टोरों पर कड़ी नजर रखने के आदेश दिए हैं।
स्टोर में रखे ही एक्सपायर हुई दवा तो होगी कड़ी कार्रवाई
बुधवार को जारी विभागीय आदेशों में स्वास्थ्य निदेशक डा. डीएस गुरुंग ने कहा है कि शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि दवा स्टोरों में काफी मात्रा में दवाएं एक्सपायर हो गई हैं, कुछ एक्सपायर होने वाली है। स्वास्थ्य संस्थानों के प्रमुखों का दवा स्टोरों पर कोई चेक नहीं है।
इस मामले पर नजर रखने के लिए कोई योजना भी नहीं बनाई गई है। ऐसे में आदेश दिए जाते हैं कि भविष्य में बीएमओ और एसएमओ दवा स्टोरों के स्टॉक पर नजर रखेंगे। कोई भी दवा व्यर्थ न जाए, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारियों को आदेश दिए गए हैं कि डाक्टरों को निर्देश दिए जाएं कि स्टोर से दी जाने वाली मुफ्त दवाएं ही मरीजों को लिखी जाएं। बाजार में मिलने वाली दवाओं को प्राथमिकता न दें। इन सभी आदेशों का पालन न होने की स्थिति में संस्थान प्र्रमुख और स्टोर प्रमुख पर कार्रवाई की जाएगी।
जन शिकायतों के निपटारे के लिए जागी सरकार
जनशिकायतों पर सुनवाई और कार्रवाई में आनाकानी करने वाली राज्य सरकार की नींद आखिरकार टूटी है। राज्य सरकार के जन शिकायत निवारण विभाग ने प्रदेश के सभी विभागों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि वह लंबित मामलों पर जल्द कार्रवाई करें।
‘अमर उजाला’ ने मोदी सरकार ने खोली हिमाचल के ई गवर्नेंस की पोल शीर्षक से खबर छापकर हिमाचल सरकार के विभागों की ओर से पीएमओ द्वारा भेजी जा रही शिकायतों की अनदेखी का खुलासा किया था। जिसके बाद राज्य के शिकायत निवारण विभाग ने सभी विभागों को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा है।
बताते चलें कि पिछले साल पीएमओ ने विभिन्न विभागों से संबंधित 1665 शिकायतें हिमाचल सरकार को निस्तारण के लिए भेजी थीं। इनमें से अब तक सिर्फ दो शिकायतों का ही डिस्पोजल हो पाया है। हिमाचल सरकार के इस ढुलमुल रवैये पर केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स एंड पब्लिक ग्रेवांसेज ने पत्र लिखकर नाराजगी जताई थी।