गुड़िया केस में पुलिस अफसरों की गिरफ्तारी से सरकार की किरकिरी, उठने लगे सवाल
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गुड़िया केस में आईजी समेत पुलिस के कई बड़े अफसरों की गिरफ्तारी से हिमाचल सरकार की खूब किरकिरी हो रही है। विपक्ष जमकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। भाजपा के सांसद अनुराग ठाकुर और प्रवक्ता डा. राजीव बिंदल ने कहा है कि सीबीआई की कार्रवाई के बाद प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।
उन्होंने कहा कि आईजी समेत आठ पुलिस वालों की गिरफ्तारी से साबित हुआ है कि मामले में किस तरह लीपापोती की गई है। इतने बड़े घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री दिल्ली में अपनी सियासी सेटिंग कर रहे हैं जबकि सरकार सवालों के घेरे में है। अब सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर आरोपी को पुलिस ने किसके कहने पर मार डाला।
दोनों नेताओं ने कहा कि सीबीआई द्वारा गुड़िया हत्याकांड की एसआईटी में लगे सभी पुलिस अधिकारियों को हिरासत में लेना देश के इतिहास की पहली घटना है। सरकार जहां आरोपियों को बचाने में लगी रही, वहीं अब सीबीआई से ही असल आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने की उम्मीद बची है।
जिस घटना के लिए प्रदेश की जनता को सड़कों पर उतरना पड़ा, उसपर सरकार पूरी तरह से लापरवाह दिखी। उन्होंने कहा कि सूरज की पुलिस लॉकअप में हत्या ने अनेक सवाल खड़े कर दिए थे। भाजपा विधायक दल ने जब कानून व्यवस्था पर सदन में चर्चा मांगी तो भी सरकार चर्चा से भागती रही। सरकार को एक भी दिन सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है।
राजनीतिक लाभ के लिए मामला न लटकाए सीबीआई
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ने सीबीआई को आगाह किया है कि वह केंद्र सरकार के दबाव में आकर उसके राजनीतिक लाभ के लिए गुड़िया मामले की जांच में देरी न करे। माकपा नेता और पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने बुधवार को राजधानी शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता गुड़िया मामले में राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।
लॉकअप में सूरज की हत्या के लिए पुलिस महानिदेशक को मुख्य अपराधी माना जाना चाहिए। डीजीपी को तुरंत पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए। माकपा ने पुलिस की एसआईटी पर गुड़िया मामले की जांच को भटकाने के लिए कई आवश्यक तथ्यों को सुनियोजित तरीके से नष्ट करने और हिमाचल सरकार पर तथ्यों को नष्ट करनेे वाले पुलिस अफसरों और कर्मचारियों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।
राकेश सिंघा ने कहा कि जिस तरह से मुख्यमंत्री के आधिकारिक फेसबुक पेज पर पहले कुछ संदिग्धों के फोटो अपलोड किए गए तथा बाद में फोटो हटा दिए गए, इस मामले की गहनता से जांच होनी चाहिए। माकपा सीबीआई जांच की सुस्त रफ्तार से संतुष्ट नहीं है। गुड़िया मामले में कुछ ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जो लोकतंत्र और जनता के लिए खतरे की घंटी है।
10 जुलाई को एसआईटी का गठन हुआ है, तब से लेकर उस टीम ने गुड़िया प्रकरण से संबंधित तथ्यों को सिलसिलेवार नष्ट करने के प्रयास किए। जिस पुलिस थाने के अंदर सूरज की हत्या हुई थी, उसी थाने की पुलिस कार्यप्रणाली की मुख्यमंत्री द्वारा सराहना करना दर्शाता है कि सीएम राजू द्वारा सूरज की हत्या करने की पुलिस की थ्योरी का समर्थन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हो सकता है कि मुख्यमंत्री अपनी फेसबुक पर अपलोड की गई संभावित अपराधियों की तस्वीरों को हटाए जाने के कारण ऐसा कर रहे हों। पार्टी ने सूरज हत्याकांड के चश्मदीद गवाह संतरी दिनेश को सुरक्षा प्रदान करने और सूरज की पत्नी ममता द्वारा दिए गए बयान को धारा 164 के तहत दर्ज किए जाने की मांग की। माकपा के राज्य सचिव ओंकार शाद, राज्य सचिवालय सदस्य संजय चौहान, डॉ. कुलदीप सिंह तंवर और प्रेम गौतम भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
आईजी की गिरफ्तारी से लगा एक और दाग : शांता
कोटखाई के गुड़िया प्रकरण में आईजी समेत अन्य पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा सांसद शांता कुमार ने प्रदेश सरकार पर हमला बोला है। कहा कि इससे पहले प्रदेश के माथे पर इतना बड़ा दाग नहीं लगा है। उन्होंने सीबीआई की ओर से आईजी और अन्य पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
शांता ने कहा कि मुख्यमंत्री पर लगे गंभीर आरोप और उसके बाद कोटखाई जैसी घटना के कारण पहले ही हिमाचल बदनाम हो चुका है। कोटखाई जैसे गंभीर अपराध की जांच के लिए जिस आईजी की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई, उस पर ही अपराधियों को बचाने का आरोप लगा है।
हिमाचल के इतिहास में इतने ऊंचे पदों पर बैठे पुलिस अधिकारियों को इस प्रकार के अपराध के आरोप में पहले कभी गिरफ्तार नहीं किया गया। यह सब बड़े नेताओं के दबाव और धन के लालच के कारण हुआ है। कहा कि प्रदेश की जनता चुनाव का इंतजार कर रही हैं, ताकि कांग्रेस को इतिहास की सबसे अधिक करारी हार देकर हिमाचल के माथे से इस कलंक को धोया जा सके।