इस भाजपा नेत्री ने नगर निगम मेयर की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, कहा- शर्म आती है
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नगर निगम की महापौर की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। भाजपा पार्षदों का विरोध झेलने के बाद अब प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष ने भी सीधे तौर पर महापौर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। नगर निगम की महापौर रह चुकीं मधू सूद शहर में पानी के बाद अब बिगड़ती सफाई व्यवस्था से खासी आहत हैं।
उनका कहना है कि शिमला में सैहब सोसायटी का गठन कर डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन योजना उनके कार्यकाल में शुरू की गई थी, लेकिन मौजूदा नगर निगम इसे संभाल ही नहीं पाया। सोसायटी की एजीएम (वार्षिक आम सभा) नहीं बुलाई जा रही।
बैठक बुला कर सदस्यों से सलाह लेनी चाहिए कि कैसे सोसायटी चलाई जाए? मधू सूद का कहना है कि शहर में सफाई का काम प्राइवेट कंपनी को सौंपने का फैसला मेयर खुद नहीं ले सकतीं। इसे लेकर एजीएम में चर्चा होनी चाहिए थी।
कहा- मेयर सुनने को ही राजी नहीं
मेयर चाहतीं तो हमसे भी सलाह ले सकती थीं, लेकिन वह सुनने को ही राजी नहीं हैं। शिमला की इतनी गंदी सूरत कभी नहीं थी, जितनी अब हो गई है। मौजूदा नगर निगम ने शहर को आगे ले जाने की जगह पीछे धकेल दिया है।
शर्म आती है जब दिल्ली से लोग फोन कर पूछते हैं कि शिमला आने लायक है या नहीं, पानी और सफाई का क्या हाल है। मधू सूद ने बताया कि सफाई का काम आउट सोर्स करने के लिए नगर निगम ने सैहब कर्मियों को निकाल दिया है।
लोगों को साढ़े तीन बजे गाड़ी में कूड़ा देने के लिए कहा जा रहा है। बुजुर्गों और नौकरीपेशा लोगों के लिए दिक्कत खड़ी हो गई है। कनलोग, शिवपुरी और केएनएच में सड़क पर कचरे के बोरे पड़े हैं। लोग मजबूरी में खुली ढलानों पर कूड़ा ठिकाने लगा रहे हैं। सफाई व्यवस्था गड़बड़ाने से बंदरों का आतंक बढ़ गया है।