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बीजेपी के कद्दावर नेता रिखीराम कौंडल का दिल का दौरा पड़ने से निधन

Tue, 17 Mar 2020 08:46 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शाहतलाई (बिलासपुर)
अमर उजाला नेटवर्क, शाहतलाई (बिलासपुर) Published by: Krishan Singh Updated Tue, 17 Mar 2020 08:46 PM IST
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BJP leader and former minister Rikhi Ram Kaundal died of a heart attack
रिखीराम कौंडल(फाइल फोटो)

हिमाचल भाजपा के कद्दावर नेता, सहकारिता मंत्री और विधानसभा उपाध्यक्ष रह चुके रिखीराम कौंडल का निधन हो गया। मंगलवार तड़के उन्हें दिल का दौरा पड़ा। परिजनों व चिकित्सकों की भरसक कोशिश के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। दोपहर बाद गोबिंद सागर झील के किनारे उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। वह 73 वर्ष के थे। पिछले कुछ समय से अस्वस्थ रहने के कारण उनकी बाईपास सर्जरी भी हुई थी।

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बिलासपुर जिले के झंडूता विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे दिवंगत रिखी राम कौंडल ने पांवटा में हुई भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति बैठक में शिरकत की थी। इस बैठक से वह सोमवार देर रात ही अपने घर पहुंचे थे। मंगलवार तड़के करीब तीन बजे उन्हें सीने में दर्द उठा। तत्काल गांव से ही एक डॉक्टर को बुलाया गया। प्राथमिक प्रयास शुरू करने के साथ ही उन्हें तलाई अस्पताल लाया गया। लेकिन, बचाया नहीं जा सका। तलाई अस्पताल में पूर्व मंत्री रिखीराम कौंडल ने अंतिम सांस ली। 

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हिमाचल की सियासत के मंझे हुए खिलाड़ी थे कौंडल

BJP leader and former minister Rikhi Ram Kaundal died of a heart attack
दिवंगत रिखीराम कौंडल - फोटो : अमर उजाला

दिवंगत रिखीराम कौंडल प्रदेश की सियासत के मंझे हुए खिलाड़ियों में से एक थे। सरल व्यक्तित्व, ईमानदार कार्यशैली और जन समस्याओं को सजग रहने के कारण अपने हलके के जनता पर उनकी अच्छी पकड़ थी। झंडूता विधानसभा क्षेत्र में कोटधार क्षेत्र की 15 पंचायतों को पिछड़ा घोषित करवाने में उनका अहम रोल रहा। पूर्व मंत्री रिखीराम कौंडल 1974 में लता ठाकुर की अगुवाई में कांग्रेस में शामिल हुए थे।1977 तक बिलासपुर जिला यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और झंडूता से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन, हार गए।

1982 में कांग्रेस का टिकट न मिलने पर आजाद उम्मीदवार के रूप में अपना जनाधार खोजा। इस बार भी उन्हें मात्र 287 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने भगवा चोला ओढ़कर सियासत के कदम आगे बढ़ाया अैर 1984 से लेकर अंतिम सांस तक भाजपा के कर्मठ सिपाही के तौर पर सक्रिय रहे। 1985, 1990, 1988, 2003 और 2012 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे।

 इस दौरान कौंडल ने सहकारिता मंत्री, विधानसभा उपाध्यक्ष, विपक्ष में विधायक दल के उप सचेतक पदों पर रहकर प्रदेश की राजनीति और लोगों में अपनी अलग पहचान बनाई। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष रिखी राम कौंडल को झंडूता की जनता उन के विकास के कार्य कोटधार की 15 पंचायतों को पिछड़ा क्षेत्र घोषित करवाने को लोग आज भी याद करते है। कलोल में उप तहसील व बहुउद्देश्यीय तकनीकी कॉलेज, झंडूता में एसडीएम कार्यालय उनके कार्यकाल के प्रमुख विकास के कार्यों में शामिल हैं।

सिटिंग एमएलए होते हुए टिकट कटने का रहा मलाल

प्रदेश भाजपा में अनदेखी और उपेक्षा का दंश दिवंगत कौंडल को अंतिम सांस तक सालता रहा। पार्टी की वर्षों तक सेवा करने और झंडूता से बतौर विधायक प्रतिनिधित्व करने के बावजूद जीवन के अंतिम पड़ाव में पार्टी से झटका ही मिला। सिटिंग विधायक होने के बावजूद पार्टी ने उनका टिकट काट दिया।

सरकार बनने पर सरकार या संगठन में सम्मानजनक समायोजन का वादा भी पूरा नहीं हो पाया। पार्टी स्तर पर मिले इस बड़े सियासी झटके से कौंडल चाहकर भी उबर नहीं पाए और इसकी टीस अंतिम सांस तक उनके मन में रही। समर्थकों के साथ बातचीत में कौंडल की यह टीस रह रहकर जुबान पर भी आ जाती थी। दुखी मन से कहते थे, उनका टिकट धोखे से काटा गया।

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