भाजपा की चार्जशीटः ढाई साल में सरकार ने किए ये 30 घपले
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा ने चार्जशीट तैयार कर ली है। इसमें सीएम वीरभद्र और मंत्रियों के खिलाफ 30 बड़े घोटाले करने का जिक्र है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रदेश में वन, भू, खनन, ट्रांसफर और शराब माफिया सक्रिय है। हिमाचल प्रदेश शांति, पर्यटन व देवभूमि, वीरभूमि के नाम से प्रसिद्ध था, लेकिन आज लूटपाट, डकैती, गैंगरेप, गोलीबारी की घटनाओं से देश भर में बदनाम हो चुका है।
मंत्रियों की संपत्तियां कई गुणा बढ़ गई हैं। रैलियां, जन्मदिन, उत्सवों के नाम पर लोगों की खून पसीने की कमाई को दोनों हाथों से लूटा जा रहा है। उन्होंने चार्जशीट में सीएम, मंत्रियों, अफसरों पर लगाए गए आरोपों की सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने चार्जशीट को राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपे जाने और प्रदेश सरकार को बर्खास्त कर हिमाचल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की।
राजभवन में चार्जशीट सौंपने से पहले धूमल ने भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार पर ‘ढैय्या’ है। सरकार तीन साल भी पूरे नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा कि इतिहास में यह पहली बार है कि किसी सरकार ने ढाई साल के कार्यकाल का जश्न मनाया हो। चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष सुरेश भारद्वाज ने भी कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस सरकार की करतूतों को अगले भाग में जारी किया जाएगा।
जानिए किस पर क्या आरोप लगे
लड़ते हैं मंत्री सीएम कराते हैं समझौता
धूमल ने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्री आपस में लड़ते हैं, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को खुद समझौता कराना पड़ता है। धूमल ने कहा कि उद्योगपतियों को पैसे देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हिमाचल से 200 उद्योग पलायन कर चुके हैं।
दबाया गया गैंपरेप मामला
धूमल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने धर्मशाला गैंगरेप के मामले को दबा दिया। भाजपा ने गैंपरेप में संलिप्त आरोपियों की जांच की मांग की, लेकिन सरकार ने जांच को आगे नहीं बढ़ाया।
पैसे लेकर हो रहे तबादले
धूमल ने कहा कि हिमाचल में ट्रांसफर माफिया सक्रिय है। पैसे देकर लोगों के तबादले किए जा रहे हैं। बेवजह कर्मचारियों और अधिकारियों को तंग किया जा रहा है। धूमल ने कहा कि हिमाचल में कांग्रेस सरकार जगह जगह जश्न मना रही है। इसके लिए पैसा कहां से आ रहा है। इस लेनदेन का कहीं भी जिक्र नहीं है।
आईपीएच विभाग में हुए ये घोटाले
-2012 में एलडब्ल्यूएसएस हमीरपुर के संवर्द्धन और नादौन के लिए क्रमश: 6,485.19 लाख और 97.59 करोड़ रुपये स्वीकृत
-16 फरवरी 2013 को निर्देश दिए कि इन योजनाओं के टेंडर ज्वाइंट वेंचर में काम करने वाली कंपनियों को नहीं दिए जाएं
-इससे इन स्कीमों का काम दो साल देरी से शुरू हो पाया।
सीएम राहत कोष
-सामान्य उद्योग निगम के खातों से मुख्यमंत्री राहत कोष में लगभग एक करोड़ की राशि दी गई, जबकि नियम के मुताबिक निगम को हुए कुल लाभ का पांच प्रतिशत ही दिया जा सकता था
-आरोप, ये सब उद्योग मंत्री के निर्देशों पर हुआ होगा
-मुख्यमंत्री राहत कोष की अधिकतर धनराशि हरोली विस क्षेत्र को ही गई।
पशुपालन विभाग
-2014-15 के लिए दवाइयां खरीदने के लिए पशुपालन विभाग ने जिन 30 फर्मों के साथ रेट-कांट्रैक्ट किया, उनमें से 15 फर्में सरकार और विभाग ने ब्लैक लिस्ट या डिबार की हैं
-ऐसी फर्मों के साथ उच्च दरों पर दवाइयों की सप्लाई मिलीभगत से की गई
-मंत्री और मुख्यमंत्री का हाथ होने का आरोप।
बाली और सुधीर के विभागों में भी घपले
शहरी विकास विभाग
-शहरी विकास मंत्री पर बिल्डर्स के पंजीकरण और नवीनीकरण में भाई-भतीजावाद फैलाने के आरोप
-2013-14 में शहरी विकास विभाग के तहत नगर परिषद सरकाघाट में विद्युत उपकरण खरीद, डस्टबिन रिपेयर, कूड़ा दबाने और स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव में गड़बड़ी हुई
-शहरी विकास मंत्री ने हिमाचल प्रदेश हिमुडा से ग्रीटिंग कार्ड छपवाने के लिए 84 हजार रुपये निकाले, जो हिमुडा के नियमों के खिलाफ है।
कंडक्टर भर्ती
-एचआरटीसी ने ढाई साल में पहले टीएमपीए के नाम पर और फिर यात्री सेवा कौशल विकास योजना के नाम पर कंडक्टरों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे
-दोनों बार आवेदन फार्म के साथ एक-एक हजार रुपये लिए गए
-दोनों बार भर्ती में अनियमितताएं बरतने के कारण अदालत ने भर्तियां स्थगित कर दीं, मगर आवेदन फीस के नाम पर इकट्ठा हुए लाखों रुपये कहां गए।
स्कूल वर्दी
-प्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम की ओर से स्कूली बच्चों को दी गई वर्दी में घटिया कपड़ा
-45 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
-उसी फर्म को दोबारा कपड़े की सप्लाई के ऑर्डर दिए
-आरोप, इससे संबंधित मंत्री भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं।
इन महकमों में भी बड़े घोटाले
बिजली मीटर/सर्विस वायर
-हिमाचल में बिजली मीटरों और सर्विस वायर को बदलने का काम पांच कंपनियों को दिया
-लाखों ऐसे मीटर बदल दिए जिनको बदलने की जरूरत नहीं थी
-कई मीटर सिर्फ कागजों में बदले, घरों में नहीं
-सर्विस वायर इतनी घटिया स्तर की है कि बिछाते-बिछाते ही टूट रही है।
फलदार पौधों की खरीद
-बागवानी विभाग ने 2013-14 और 2014-15 में क्रमश: 13,73,268 और 16,84,146 फलदार पौधे खरीदे
-किसी भी प्रजाति के पौधे 25 से 40 ही प्रति बीघा लगाए जा सकते हैं, इसलिए दोनों वर्षों में खरीदे गए कुल 30,57,414 पौधों के लिए 10 लाख 20 हजार बीघा जमीन चाहिए, जबकि हिमाचल प्रदेश में बागवानी के अंतर्गत इतनी जमीन है ही नहीं।
कौशल विकास भत्ता
-बेरोजगारी भत्ता देने का वायदा कर सत्ता में आई सरकार ने बेरोजगारी भत्ता न देकर युवाओं को धोखा दिया
-उनके लिए पहले से चलाई जा रही कौशल विकास भत्ता योजना में घोटाला किया
-प्राइवेट संस्थानों में प्रशिक्षण ले रहे युवाओं को कौशल विकास भत्ता देने के नाम पर कांग्रेस पार्टी के चहेतों की ओर से फर्जी तौर पर चलाए जा रहे प्राइवेट संस्थानों को लाभ पहुंचाए
-अनेक फर्जी संस्थान चला रहे हैं कांग्रेस नेता।
अवैध कटान का मामला भी उछला
मिड हिमालयन प्रोजेक्ट
-वन विभाग के मिड हिमालयन प्रोजेक्ट के माध्यम से जिला बिलासपुर की नम्होल और स्वारघाट डिवीजन में पिछले ढाई वर्षों में सिर्फ उन्हीं पंचायतों को पैसा दिया गया, जहां कांग्रेस पार्टी के प्रधान हैं
-भाजपा से संबंधित प्रधानों को पंचायतों में न के बराबर पैसा दिया गया
-नम्होल डिवीजन में 74 में से 73 कामों और स्वारघाट डिवीजन में सभी कार्यों में सिर्फ 3-3 निविदाएं ही आईं।
अवैध कटान
-वन मंत्री और सीपीएस पर आरोप, बीते वर्ष बिलासपुर में सरकारी भूमि पर हो रहे खैर के अवैध कटान को देखने जब वन मंत्री मौके पर गए तो उन्होंने वन अधिकारियों को कटान रोकने और कटी हुई खैर की लकड़ी जब्त करने के आदेश दिए
-15 दिन बाद कटान रोकने के आदेश वापस लिए और लकड़ी लौटा दी।
टोल टैक्स
-बैरियरों पर टोल टैक्स इकट्ठा करने के लिए हर साल नीलामी की जाती है और हमेशा इसमें बढ़ोतरी होती है
-इस साल टोल टैक्स बैरियरों पर टोल टैक्स इकट्ठा करने के लिए नीलामी में 86 करोड़ की कमी
-मंत्री के चुप रहने से उनकी संलिप्ता की आंशका।
डीजल
-एचआरटीसी ने अपने डिपुओं में स्थापित पंपों को बंद कर बसों में डीजल प्राइवेट पंपों से भरवाना शुरू कर दिया
-इसके लिए न टेंडर किए गए और न ही बोली लगाई
-इसके लिए परिवहन मंत्री जीएस बाली को दोषी ठहराया।
बाली के हर महकमे में घपले के आरोप
लैब
-प्रदेश के 22 अस्पतालों की प्रयोगशाला को एक बहुराष्ट्रीय कंपनी को देने से गरीब लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा
-इससे प्रदेश को आर्थिक नुकसान पहुंचाकर कंपनी को आर्थिक लाभ पहुंचाया
-कंपनी के साथ एमओयू सिंगल टेंडर के रूप में ही स्वीकृत हुआ
-लैब में किए टेस्टों की रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं।
स्वां प्रबंधन परियोजना
-ऊना स्वां एकीकृत जलागम प्रबंधन परियोजना में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर
-एमटीसी भवन ऊना व भराड़िया पुल निर्माण में अनियमितताओं की जांच तो सतर्कता विभाग कर रहा लेकिन जांच धीमी।
दालें
-खाद्य आपूर्ति निगम ने 9 दालों की निविदाएं आमंत्रित की
-टेंडर खुलने के बाद मंत्री तय करते हैं कि कौन 3 दालों को खरीदना
-जिन फार्म के साथ मंत्री का तालमेल हो जाता है, उन्हें ही टेंडर
-बार-बार टेंडर रद्द किया जाना घोटाले को दर्शाता है।
इन पर भी लगे घपले के आरोप
औद्योगिक प्लांट
--सीपीएस नीरज भारती पर आरोप, औद्योगिक क्षेत्र ज्वाली में एक इंडस्ट्री के नाम से लीज पर उद्योग लगाने के लिए प्लॉट नं. 2 अलॉट करवाया और 14 जून, 2002 को उद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ इस लीज एग्रीमेंट में अन्य शर्तों के साथ-साथ इस प्लॉट में सिर्फ औद्योगिक इकाई स्थापित करने और 2 साल के अंदर काम शुरू करने की भी शर्त थी
--पिछली कांग्रेस सरकार के समय ज्वाली औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट नं. 2 के साथ लगती 49.41 वर्ग मीटर भूमि भी अपनी फर्म के नाम अलॉट करवा ली और इसका भी 12 मार्च, 2004 को हस्ताक्षरित किया
--इसमें भी वही शर्तें थी कि उक्त जमीन पर प्रार्थी कोई और गतिविधि नहीं करेगा अपितु सिर्फ और सिर्फ औद्योगिक इकाई स्थापित करेगा, नहीं तो सरकार लीज रद्द कर जमीन वापस ले लेगी।
वन विभाग
--वन विभाग ने इन ढाई वर्षों में 6.88 करोड़ के पोल खरीदे जिनको खरीदने का प्रदेश में कोई एक समान फार्मूला नहीं बनाया
--कुछ जिलों को छोड़कर अन्य जिलों में कांग्रेस समर्थित कार्यकर्ताओं से पोल खरीदे गए जिनके पास सीमेंट के पोल बनाने की कोई इंडस्ट्रीज नहीं।
तबादले
--पैसे देकर ट्रांसफर
--मुख्यमंत्री, मंत्री, कांग्रेसी विधायक, पूर्व कांग्रेस विधायक व कांग्रेस पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशी व आम छुटभैये कांग्रेसी नेता सभी बदनाम
--फर्जी डीओ प्रकरण में सामने आया जिसमें विधायकों के फर्जी डीओ ट्रांसफर हुई
--मुख्यमंत्री के फर्जी डीओ पर भी ट्रांसफर होने के मामले सामने आए।
खाद में घोटाले का आरोप
--इफको लिमिटेड चंडीगढ़ से 6161.700 मीट्रिक टन खाद एनपीके 12-32-16 की खरीद 1600 रुपये प्रति मीट्रिक टन की गई और इसी कंपनी से 9320.050 मीट्रिक टन यही खाद 21,820 रुपये प्रति मीट्रिक टन खरीदी
--इस प्रकार जहां ऐसी खरीद से प्रदेश को 5 करोड़ रुपये का चूना लगा वहीं किसानों को भी महंगी खाद देकर उनका शोषण किया
--सेब को माइट रोग लगने पर बागवान सरकारी दवाईयों का प्रयोग कर रहे हैं लेकिन उनका कोई असर नहीं।
स्वां चैनेलाइजेशन प्रोजेक्ट
--ऊना के 1000 करोड़ के स्वां चैनेलाइजेशन प्रोजेक्ट में चोरी व गड़बड़ी की घटनाएं आम
--हरोली व ऊना में स्वां नदी तटीकरण के तार की चोरी के मामले दर्ज
--कई जगह कबाड़ियों से कई क्विंटल तार पकड़ी
--पुलिस दोषियों को पकड़ने की बजाय मामलों को रफा-दफा करने में लगी
--दोषियों को सरकार का संरक्षण।
भाजपा ने इनकी भी खोली पोल
मार्केट कमेटी
--नौणी विवि के एक वैज्ञानिक को एमडी की कुर्सी पर बैठा दिया
--चेयरमैन के साथ-साथ एडवाइजर भी लगा दिया
--बिना टेंडर लाखों रुपये का मरम्मत का काम हुआ
--मार्केट कमेटी कुल्लू ने अध्यक्ष कार्यालय व कांफ्रेस हाल के नवीनीकरण की स्वीकृति लिए बिना टेंडर लगाए।
आटा पिसाई
--भारतीय खाद्य निगम से हिमाचल को 634.40 रुपये की (वैट मिलाकर) गेहूं मिला
--इस गेहूं को सीधा गेहूं के रूप में ही उपभोक्ता को दिया जा सकता था लेकिन बड़े-बड़े आटा मिल मालिकों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर किया
--ऐसी शर्तें रखीं जिन्हें छोटी चक्की वाला कभी पूरा नहीं कर सकता।
घटिया उपकरण खरीद
--संजय जल विद्युत परियोजना भावानगर और काजा स्थित रौंग-टौंग विद्युत परियोजनाओं के अलावा ट्रांसमिशन लाइनों में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता घटिया होने के कारण बिजली बोर्ड को करोड़ों रुपये की हानि
--इस कारण ही कुछ दिन पूर्व संजय जल विद्युत परियोजना में आग की घटना घटी
--रौंग-टौंग पावर प्रोजेक्ट के ट्रायल के समय वॉल्व फटने से ही हादसा घट गया और तीन इंजीनियरों की मौत हो गई।
टायर, स्पेयर पार्ट गायब
--एचआरटीसी हमीरपुर डीएम ऑफिस के भंडार से ऊना के लिए 345 टायर और स्पेयर पार्ट भेजे गए लेकिन करोड़ों का यह सामान ऊना पहुंचा ही नहीं
--न तो सामान का पता लगा और न ही इस पर मामला दर्ज किया।
लोक निर्माण विभाग
--लोक निर्माण विभाग में बड़े-बड़े कामों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट कर वर्क ऑर्डर लगाए जाते हैं
--अधिकारी नहीं बल्कि कांग्रेस नेता तय करते हैं कि कौन सा काम किस कांग्रेस नेता को करना है
--टेंडर तो होते ही नहीं, अगर हो जाए तो मिलीभगत से मनचाहे रेट पर कांग्रेसी ठेकेदारों को काम दे दिया जाता है।
यहां भी जमकर हुआ घपला
बस खरीद
--सत्ता में आते ही कांग्रेस सरकार ने जब बसें वैट लीजिंग पर लीं तब घोटाला किया
--अब जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत केंद्र सरकार से बसें खरीदने के लिए पैसा मिला जो प्रोजेक्ट रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम ने भेजी थी, उसके अनुसार बसों में जीपीएस प्रणाली तथा बसों के ऊपर लगेज कैरियर लगाने का प्रावधान था
--उस अनुसार केंद्र सरकार से धनराशि भी स्वीकृत हो गई थी लेकिन बसों में सुविधा नहीं दी गई
--मंत्री पर घोटाले का आरोप।
शैक्षणिक संस्थान
--बीटेक में प्रवेश के लिए ज्वाइंट इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन को जरूरी किया जबकि पड़ोसी राज्यों में बाध्यता नहीं
--बाहरी राज्यों के शिक्षण संस्थानों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया।
विश्वविद्यालय
--नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति ने बागवानी अनुसंधान केंद्र मशोबरा में मुख्य अनुसंधानकर्ता की हैसियत से विदेशी संस्था द्वारा प्रदान की गई 2.10 करोड़ लागत वाले ‘यूरोपियन यूनियन अंतरराष्ट्रीय कोलेबोरेशन प्रोजेक्ट को यूनिवर्सिटी एक्ट, मैनुअल एवं फारेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट के प्रावधानों की अवहेलना करते हुए गैर कानूनी रूप से प्रस्थापित किया गया
--इसी प्रकार चौधरी श्रवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के उप कुलपति पर अपनी शैक्षणिक योग्यता व अनुभव की गलत जानकारी देने, विवि के धन और गाड़ियों के दुरुपयोग तथा महिला उत्पीड़न के आरोप तथ्यों सहित लगे लेेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।
घटिया दवाएं
--2013 में 5 और वर्ष 2014 में 2 दवा निर्माताओं के यहां पंजाब पुलिस ने छापे मारे और घटिया दवाइयों के सैंपल पकड़े
--हिमाचल प्रदेश स्थित कंपनियों के जो सैंपल प्रदेश के ड्रग प्रशासन द्वारा टेस्टिंग के लिए प्रदेश स्थित लैब सीटीएल कंडाघाट भेजे गए
--उनमें से 7 ड्रग सैंपल फेल पाए गए जबकि प्रदेश के बाहर अन्य प्रदेशों के ड्रग प्रशासन द्वारा जो टेस्ट करवाए गए
--उनमें से 216 सैंपल फेल पाए गए
--इस पर प्रदेश सरकार द्वारा कोई कार्रवाई न करना दर्शाता है कि आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामले में भी भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है।