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बायोमीट्रिक मशीनें हांफीं, अफसरों को शक, शिक्षकों ने कर दीं खराब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 05 Jul 2018 01:29 PM IST
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ट्रायल के तौर पर प्रदेश के कुछ सरकारी स्कूलों में लगाई गई बायोमीट्रिक मशीनें खराब हो गई हैं। बायोमीट्रिक मशीनों के खराब होने की वैसे तो जांच शुरू हो गई है। प्रारंभिक जांच में शक की सूई शिक्षकों पर घूम गई है। विभागीय अधिकारियों को शक है कि बायोमीट्रिक पर रोजाना हाजिरी लगाने से बचने के लिए शिक्षक भी मशीनों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।
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हालांकि मामले की जांच के बाद ही इसके कारणों का खुलासा हो सकेगा। स्कूलों में शिक्षकों के लगातार गैरहाजिर रहने की शिकायत को देखते हुए निदेशालय ने ट्रायल के तौर पर कुछ स्कूलों में मशीनें लगाई थी। ये खराब हो गई हैं। मशीनें खराब से दस हजार नई मशीनें लगाने का मामला अटक गया है।
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उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों से खराब हुई मशीनों को मंगवा लिया है। मशीनें लगाने वाली कंपनी को खराब मशीनें सौंप कर जांच करने को कहा है। जांच पूरी होने तक निदेशालय ने बायोमीट्रिक मशीनों की खरीद पर रोक लगा दी है।
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प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों में आधार नंबर से लिंक बायोमीट्रिक मशीनें लगाई जानी हैं। इसके लिए प्रदेश के सभी शिक्षकों और गैर शिक्षकों का अटेंडेंस पोर्टल पर पंजीकरण कर लिया गया है। आधार से जुड़ी बायोमीट्रिक मशीनें पुरानी मशीनों से भिन्न होती हैं। इन आधुनिक मशीनों की मानीटरिंग इंटरनेट के माध्यम से प्रदेश में कहीं से भी हो सकती है।
इन मशीनों के लगने से उच्च अधिकारी अपने कंप्यूटर सिस्टम से देख सकेंगे कि कितने शिक्षक स्कूल में हाजिर रहे और कितने गैर हाजिर। उच्च शिक्षा निदेशालय ने बीते दिनों खरीद प्रक्रिया शुरू की थी। स्कूल-कॉलेजों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमीट्रिक मशीनें लगाने का फैसला लिया गया है।
पूर्व की कांग्रेस सरकार के समय से स्कूल-कॉलेजों में मशीनें लगाने की फाइल चली हुई है लेकिन अफसरशाही की सुस्त कार्य प्रणाली के चलते मामला सिरे नहीं चढ़ रहा था। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही इस मामले में तेजी आई थी लेकिन अब कुछ स्कूलों में मशीनों के खराब होने के चलते मामला दोबारा फंस गया है।