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बिलासपुर हादसा: पहाड़ी से अकसर गिरते हैं मिट्टी और पत्थर, आठ दिन पहले ही चेताया था, अब चली गईं 16 जानें

Wed, 08 Oct 2025 09:57 AM IST
Krishan Singh नीरज महाजन, संवाद न्यूज एजेंसी, भराड़ी (बिलासपुर)।
नीरज महाजन, संवाद न्यूज एजेंसी, भराड़ी (बिलासपुर)। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 08 Oct 2025 09:57 AM IST
सार

बिलासपुर जिले के बरठीं के भल्लू पुल के पास हुए भीषण हादसा से पूरे क्षेत्र हिला गया है। घटनास्थल पर मौजूद सूबेदार मेजर कुलवंत सिंह पटियाल ने बताया कि यह जगह पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील थी। 

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Bilaspur accident: The administration was warned eight days ago, but 15 lives were lost due to lack of precaut
घटनास्थल पर बचाव अभियान। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के बरठीं के भल्लू पुल के पास हुए भीषण हादसा से पूरे क्षेत्र हिला गया है। घटनास्थल पर मौजूद सूबेदार मेजर कुलवंत सिंह पटियाल ने बताया कि यह जगह पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील थी। पहाड़ी से अकसर मिट्टी और पत्थर गिरते रहते थे, लेकिन विभाग ने इसे ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित करने या स्थायी सुरक्षा उपाय करने की कोई कोशिश नहीं की। उनका कहना है कि भल्लू पुल का यह हिस्सा हमेशा से खतरे में बताया जा रहा था। बरसात के बाद पहाड़ी में दरारें पड़ गई थीं। ग्रामीणों ने कई बार विभाग को सूचित किया। आठ दिन पहले भी लोगों ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से इस हिस्से में को मजबूत और सुरक्षित करने की मांग की थी। इसके बावजूद इसको लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया। अब हुआ हादसा उस अनदेखी का परिणाम है। मरोतन से घुमारवीं रूट पर दिन में संतोषी बस दो बार चलती थी।

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एक ओर कच्ची पहाड़ी है तो दूसरी ओर गहरी खड्ड
भल्लू पुल के इस हिस्से पर एक ओर कच्ची पहाड़ी है तो दूसरी ओर गहरी खड्ड। यही कारण है कि हादसे के बाद प्रशासन ने यह आशंका भी जताई कि कुछ यात्री पहाड़ी से नीचे खड्ड में गिर गए होंगे। खोज अभियान के दौरान जेसीबी मशीनों को नीचे तक उतारा गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई शव या व्यक्ति नीचे न दबा हो। यह बस रूट पर दिन में केवल दो बार चलती थी। सुबह 7:30 बजे यह घुमारवीं बस अड्डे से चलकर सुन्हाणी, बरठीं, भड़ोली कलां, कलोल और जेजवीं होते हुए मरोतन पहुंचती थी। दोपहर करीब 12:30 बजे वापस लौटती थी और फिर दोपहर एक बजे दूसरा फेरा लगाती थी। लगातार तीन दिनों से तेज बारिश ने सड़क की पहाड़ी को कमजोर कर दिया था। इसके चलते मंगलवार को 16 परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। जिन घरों में सुबह लोग काम पर निकले थे, शाम तक वहां मातम छा गया था।

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लोगों ने बचाव कार्य में की मदद
घटना के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और अपनी जान की परवाह किए बिना राहत कार्य शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में पुलिस, प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंची। एनडीआरएफ की टीम ने रात करीब नौ बजे रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाली। सलापड़ से तीन वाहनों में दर्जनों प्रशिक्षित जवान घटनास्थल पहुंचे। अंधेरा होने के कारण मौके पर जनरेटर की व्यवस्था की गई। मलबे में फंसे यात्रियों को निकालने का अभियान शुरू किया गया। देर रात तक जेसीबी मशीनों और प्रशिक्षित डॉग स्क्वाड की मदद से मलबा हटाने का कार्य जारी रहा।

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मानसून में 210 गंवा चुके हैं जान
शिमला। मानसून के दौरान बारिश, भूस्खलन से 190 लोगों की मौत हुई है। इनमें बिलासपुर में 8, चंबा में 26, हमीरपुर में 3, कांगड़ा में 22, किन्नौर में 15, कुल्लू में 13, लाहौल स्पीति में 4, मंडी में 25, शिमला में 25, सिरमौर में 11, सोलन में 25 और ऊना में 13 लोगों की जान गई। अब तक 210 लोगों की हुई है। 

साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद मलबे से निकाले 15 शव
भल्लू में हुए हादसे में मलबे में दबे 15 शवों निकालने के लिए करीब साढ़े तीन घंटे का समय लगा। करीब साढ़े छह बजे हादसा हुआ। इसके तुरंत बाद रेस्क्यू अभियान शुरू हुआ। रात 10 बजे तक 15 शव और दो बच्चों को सुरक्षित निकाला गया। बुधवार सुबह लापता बच्चे का शव बरामद किया गया।  हादसे में मरने वालों की संख्या अब 16 हो गई है।  बारिश थमते ही भल्लू पुल बस पर आ गिरी और पूरी बस मलबे में दब गई। हादसे की आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। इस दौरान बस पूरी तरह मलबे में दब चुकी थी। बस की छत उखड़कर नीचे जा गिरी। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। अंधेरा और लगातार मिट्टी गिरने से रेस्क्यू कार्य में भारी परेशानी हुई। साढ़े तीन घंटे तक चले राहत कार्य में एनडीआरएफ की टीम ने कुत्तों की सहायता से शवों को ढूंढ निकाला। देर रात तक जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम चलता रहा।  हादसे की जगह पहाड़ी से मिट्टी गिरने से रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी हुई।

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