शिमला में बड़ा हादसा, स्कूली बच्चों से भरी बस खाई में गिरी, दो छात्राओं समेत तीन की मौत
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राजधानी शिमला में सोमवार को हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की स्कूल बस लोअर खलीनी में सड़क से करीब 300 मीटर गहरी खाई में लुढ़क गई। इस हादसे में कॉन्वेंट ऑफ जीजस एंड मैरी (चेल्सी) स्कूल की दो छात्राओं और ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे में घायल कंडक्टर और पांच छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों का आईजीएमसी शिमला में उपचार चल रहा है। हादसे की वजह सड़क पर अवैध पार्किंग बताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस सुबह 7:30 बजे झंझीड़ी से निकली थी। सूद भवन के पास अवैध पार्किंग से सड़क संकरी थी जिससे बस के टायर कच्ची सड़क पर उतर गए। मिट्टी धंसने के कारण बस सड़क से खाई में जा गिरी।
चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायल बच्चों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद आंखों में आंसू और हाथों में डंडे लेकर अभिभावक लोअर खलीनी में सड़क पर उतर आए और अवैध रूप से पार्क दर्जनों गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए।
कई गाड़ियों को आग लगाने की कोशिश भी की गई लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद करीब तीन घंटे तक खलीनी-झंझीड़ी सड़क पर चक्का जाम कर दिया। बताया जा रहा है कि करीब दस साल पुरानी बस का बीमा 3 जनवरी को खत्म हो चुका था।
बावजूद इसके एचआरटीसी प्रबंधन इस बस का बतौर स्कूल बस संचालन कर रहा था। एसपी ओमापति जमवाल ने कहा कि मुकदमा दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
ये हुए हादसे का शिकार
हादसे में चेल्सी स्कूल की मेहल तीसरी, मान्या सातवीं कक्षा और सोलन बनगढ़ के बस ड्राइवर नरेश कुमार की मौत हो गई है। घायलों में सुनिधि ठाकुर दसवीं, शरीन ठाकुर छठी, अनुशी शर्मा सातवीं, ऋतिका शर्मा छठी, उमंग चंदेल दसवीं कक्षा और पालमपुर के कंडक्टर सुरेश कुमार घायल हुए हैं।
बीच सड़क पर खराब हो गई एंबुलेंस
हादसा होते ही स्थानीय लोग भागते हुए दुर्घटना स्थल पर पहुंचे और घायलों को अपने निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया। हादसे के करीब पौने घंटे बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची। एक एंबुलेंस काली माता मंदिर के पास बीच सड़क पर खराब हो गई, जिसे लोगों ने धक्का मारकर सड़क के किनारे किया।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने बस दुर्घटना पर शोक जताया
उन्होंने भगवान से घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जाएगी तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, नगर निगम शिमला की महापौर कुसुम सदरेट, हिमाचल प्रदेश रेडक्रॉस अस्पताल कल्याण शाखा (एचडब्ल्यूएस) की अध्यक्ष डॉ. साधना ठाकुर भी मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे। राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्माओं की शांति तथा शोक संतप्त परिवारों के सदस्यों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने दुख जताया
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट अफेयर्स राज्यमंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर ने शिमला के खलीनी बस हादसे के मृतकों के प्रति शोक प्रकट किया है और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि शिमला के खलीनी में बस हादसा दुखद घटना है। जिला प्रशासन और सरकार दुर्घटना पीड़ितों के हरसंभव मदद के लिए तत्परता से काम कर रही है।
हादसों के लिए सरकार जिम्मेदार : सुक्खू
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और विधायक सुखविंद्र सिंह सूक्खू ने शिमला के झंझीडी बस हादसे पर दुख जताते हुए भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार की लापरवाही के कारण सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर सहित अन्य मंत्री बयान देने तक ही सीमित हैं। सरकार हादसे रोकने के लिए आज तक कोई ठोस नीति बना ही नहीं पाई।
सोमवार को झंझीडी में हुई बस दुर्घटना ने नूरपुर बस हादसे के जख्म ताजा कर दिए। सरकार बताए कि मासूम बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है। नूरपुर बस दुर्घटना के बाद सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ।
शिक्षा मंत्री पर भी टूट पड़े गुस्साए अभिभावक, उलटे पांव लौटे
घटना स्थल पर पहुंचे शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज पर भी अभिभावक और लोग टूट पड़े। लोगों ने मंत्री से पूछा, आज जिन बच्चों की मौत हुई है, उसके लिए कौन जिम्मेदार है। बोल बोलकर हम थक चुके हैं।
हमारी कोई नहीं सुनता। आपकी एंबुलेंस यहां खराब खड़ी है। आपकी सरकार आंखें मूंदकर सोई है। एक व्यक्ति ने कहा कि मंत्री जी इस हादसे में आपके ही कार्यकर्ता की बेटी की भी जान चली गई है।
लोगों का बढ़ता गुस्सा देख मंत्री ने उन्हें शांत करने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने। लोगों का गुस्सा देख मंत्री उलटे पांव लौट गए। इसके बाद मंत्री घायलों की हालत जानने के लिए आईजीएमसी अस्पताल चले गए।