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मनी लांड्रिंग केस: सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य को हाईकोर्ट से राहत

Fri, 30 Sep 2016 09:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 30 Sep 2016 09:58 AM IST
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Big relief to vikramaditya singh from High Court

आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। अदालत ने उन्हें 30 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है, लेकिन अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी के समक्ष वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य ने इसी मामले में एलआईसी एजेंट की गिरफ्तारी का हवाला देकर स्वयं की गिरफ्तारी की आशंका जाहिर करते हुए संरक्षण का आग्रह किया। याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को ईडी ने समन जारी कर 30 सितंबर को बुलाया है लेकिन जांच से जुड़े दस्तावेज नहीं दिए।

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प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष पेश होकर जांच में हों शामिल: हाईकोर्ट

Big relief to vikramaditya singh from High Court

इस बात की पूरी संभावना है कि ईडी पूछताछ के दौरान उनके मुवक्किल को गिरफ्तार कर सकती है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मामला तक दर्ज नहीं है और उन्हें फर्जी तरीके से फंसाया जा रहा है। इसके अलावा उनके मुवक्किल की याचिका हाईकोर्ट में ही लंबित है, ऐसे में गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए।

ईडी की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि हमने याची को पूछताछ के लिए बुलाया है। किसी भी मामले में गिरफ्तारी जांच पर निर्भर होती है। अदालत ने सुझाव दिया कि यदि याची जांच में शामिल होने के लिए व्यक्तिगत रूप से पेश होता है तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। यदि गिरफ्तारी की जरूरत है तो उसे एक तय अवधि तक का नोटिस दिया जाए। अदालत ने याचिका पर सुनवाई 30 नवंबर तय कर दी।

प्रतिभा सिंह ने दोबारा जांच को अधिकारों का हनन बताया

Big relief to vikramaditya singh from High Court

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने कहा कि आय से अधिक संपत्ति के कथित मामले में मेरे खिलाफ सीबीआई द्वारा एक बार जांच बंद कर दोबारा जांच करना मेरी स्वतंत्रता का हनन है। उन्होंने हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी के समक्ष प्रतिभा सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने कहा कि सीबीआई को जांच के दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश कर यह साबित करना चाहिए कि उसके द्वारा की जा रहीं जांच पूर्व में बंद की गई जांच से अलग है। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की और साक्ष्य नहीं होने के आधार पर जांच बंद कर दी।

सीबीआई के पास इस मामले में शिकायकर्ता एनजीओ कॉमन कॉज की शिकायत, सीवीसी के दस्तावेज आदि थे तो तब उसने जांच बंद क्यों की। अब फिर किस आधार पर जांच शुरू की गई और क्या नए साक्ष्य मिले। उन्होंने कहा कि सीबीआई को अदालत के समक्ष अपनी डेली डायरी, एफआईआर की कॉपी पेश करनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल किया कि जब सीबीआई ने पूर्व में अपनी प्रारंभिक जांच का आधिकारिक रूप से अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश ही नहीं की थी तो उसका होना या न होने पर सवाल ही नहीं उठता। अदालत ने 27 सितंबर को मामले में रोजाना सुनवाई करने का निर्णय किया था।

अब 1 अक्टूबर को मामले की सुनवाई होगी। सीबीआई ने वीरभद्र, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह व अन्य पर आय से अधिक व भ्रष्टाचार की धाराओं में मामला दर्ज किया है। उन्होंने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी है वहीं सीबीआई मामले में आरोपपत्र दायर करने की अनुमति मांग रही है।

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