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हिमाचल में किलो के हिसाब से सेब खरीद रहीं बड़ी कंपनियां
Tue, 18 Aug 2020 05:00 AM IST
Krishan Singh
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 18 Aug 2020 05:00 AM IST
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सेब सीजन हिमाचल
- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल के ऊंचाई वाले इलाकों से सेब खरीदने के लिए वॉलमार्ट और सफल जैसी नामी कंपनियां मैदान में उतर चुकी हैं। ये कंपनियां बागवानों से गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए सेब की खरीद कर रही हैं। इस बार बड़ी कंपनियों के सेब खरीदने से प्रदेश की मार्केट में प्रतिस्पर्धा पैदा हो गई है। पहले गिनती की कंपनियां ही सेब खरीदती थीं, लेकिन इस बार बड़ी कंपनियों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। इससे बागवानों को काफी राहत मिली है।
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सेब प्रतिकिलो के हिसाब से खरीदा जा रहा है और बागवानों इसके बेहतर दाम मिल रहे हैं। सेब सीजन में इस बार वॉलमार्ट, बिग बास्केट, अदानी, रिलायंस फ्रेश और सफल जैसी बड़ी कंपनियाें के अलावा अन्य कंपनियां भी बागवानों से सीधे सेब खरीद रही हैं। सेब के रंग, आकार और गुणवत्ता के हिसाब से बागवानों को सेब के दाम मिल रहे हैं। कंपनियां बागवानों से कार्टन की जगह क्रेटों में ही सेब खरीद रही हैं। प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के सेब का बड़ी कंपनियां बेसब्री से इंतजार करती हैं। अधिक ऊंचाई के सेब की भंडारण अवधि अधिक है। मई और जून में यह सेब बाजार में बेचा जाता है।
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बागवानों को ऑनलाइन किया जा रहा भुगतान
ये कंपनियां सेब खरीदने के बाद एक हफ्ते के भीतर बागवानों को ऑनलाइन भुगतान कर रही हैं। इससे बागवानों के साथ धोखाधड़ी की आशंका भी कम रहती है। इन कंपनियों को सेब बेचने से बागवानों का पैकिंग, ग्रेडिंग और ढुलाई का करीब ढाई सौ रुपये प्रति पेटी खर्च बच रहा है।
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हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक नरेश ठाकुर ने कहा कि बड़ी कंपनियों के आने से बागवानों के समक्ष विकल्प है कि वह जहां अच्छा दाम मिले, वहां सेब बेच सकते हैं। बड़ी कंपनियों के सेब खरीदने से बागवानों को किलो के हिसाब से रेट मिल रहे हैं। बागवानों का कार्टन, पैकिंग, ग्रेडिंग और ढुलाई का खर्चा बच रहा है।