Bharat Bandh Today: हिमाचल में भी विभिन्न संगठनों की हड़ताल और विरोध प्रदर्शन, सीटू के बैनर तले जमा हुए लोग
वीरवार को ट्रेड यूनियनों और किसान यूनियनों ने देशभर में हड़ताल बुलाई है। इसी बीच इस हड़ताल का असर हिमाचल में भी देखने को मिल रहा है। हर जिले में सीटू के बैनर तले विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...
विस्तार
केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बेचने और नए लेबर कोड के विरोध में वीरवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर हिमाचल प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है। राजधानी शिमला में सीटू के बैनर तले विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इस विरोध में पंचायत भवन ओल्ड बस अड्डे से लेकर बाजार होते हुए सीटीओ तक रैली निकाली जाएगी।
ऊना में हल्ला बोल
सीटू के बैनर तले एमसी पार्क ऊना में विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ खूब हो हल्ला बोल और केंद्र सरकार के जोरदार नारेबाजी की। सभी संगठनों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार को कर्मचारी विरोधी निर्णय को वापस लेने का आह्वान किया।
एटक से संबद्ध मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनियन के आह्वान पर कार्यकर्ता लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में जुटने लगे हैं और थोड़ी देर में धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। यूनियन ने साफ किया है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा। राज्य अध्यक्ष कमलेश ठाकुर ने कहा कि वर्षों से बेहद कम मानदेय पर कार्य कर रही मिड डे मील कर्मियों की लगातार अनदेखी की जा रही है। हालिया बजट में मानदेय वृद्धि का कोई प्रावधान नहीं किया गया और नियमितीकरण के लिए भी ठोस नीति सामने नहीं आई।
एटक के भारत बंद के आह्वान पर सोलन के मालरोड पर विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने विरोध रैली निकाली। इस रैली में शूलिनी ऑटो यूनियन, मिड-डे-मील वर्कर, बैंक कर्मी, नगर निगम सफाई कर्मचारी यूनियन समेत अन्य ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एटक के बैनर तले यूनियन के सदस्यों ने एक जुट होकर कहा कि केंद्र सरकार अपनी मनमानी कर रही है। औद्योगिक व निजी सेक्टर में कार्य करने वालों के विरुद्ध श्रम सहिंता तैयार कर दी है। मालिक को फायदा पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। बिना नियम के ऑनलाइन सेवाएं चलाई जा रही है। इससे वे ककफी परेशान है।
मनरेगा कर्मचारी यूनियन ने सीटू के बैनर तले केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिलाओं ने कहा कि पंचायत में पिछले 2 साल से मनरेगा के काम बंद पड़े हैं जिसके चलते पंचायत में विकास कार्य ठप पड़े हैं उन्होंने सरकार से मांग की है कि नियमों के तहत मनरेगा में पात्रता रखने वाले लोगों को काम मिलना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्र में विकास को गति मिल सके।
अपनी मांगों को लेकर 108 और 102 कर्मी हड़ताल पर बैठ गए हैं। 102 और 108 कर्मियों के हड़ताल पर जाने से कुल्लू में एंबुलेंस के पहिए थम गए हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अतिरिक्त चालकों की नियुक्ति की है। हड़ताल के चलते मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है।
न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर सीटू के बैनर तले 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन जिला ऊना ने नारेबाजी करते हुए रोष प्रकट किया और कहा कि सरकार श्रम कानून के तहत कर्मचारियों को वेतन लागू करें अन्यथा इस वर्ग के कर्मचारियों की हड़ताल नियमित रूप से जारी रहेगी।
एटक से संबद्ध यूनियनों ने वीरवार को जिला मुख्यालय नाहन में रोष रैली निकाली। रैली नाहन बस अड्डे से शुरू हुई जो उपायुक्त कार्यालय तक पहुंची। यहां पर केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। यूनियन ने साफ किया है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
मंडी: केंद्र के 4 श्रम कोड के खिलाफ सड़कों पर उतरे मजदूर और किसान संगठन
केंद्र सरकार द्वारा गत वर्ष लागू किए चार नए श्रम कोड के विरोध में मजदूर और किसान संगठनों के राष्ट्रीय आहवान पर आज देश भर में धरना प्रदर्शन किए गए। इसी कड़ी में मंडी जिला मुख्यालय पर भी विरोध प्रदर्शन और रैली निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। हिमाचल प्रदेश मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव यूनियन के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर और सीटू के जिला सचिव राजेश शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम कोड पूरी तरह से मजदूर विरोधी हैं। इन्हें तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए। मजदूरों को 30000 न्यूनतम वेतन दिया जाना चाहिए। आंगनवाड़ी, मिड डे मील व अन्य योजना कर्मियों को नियमित करके उन्हें सरकारी कर्मचारी की सुविधा दी जाए। इन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इनकी मांगों को नहीं माना गया तो फिर आने वाले समय में अनिश्चितकालीन की जाएगी।
इस विरोध प्रदर्शन में बहुत से अस्थाई कर्मियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर अपनी मांग भी सरकार से रखी। जिसमें ग्रेच्युटी को लागू और मनरेगा को बहाल करके, सार्वजनिक क्षेत्र का विनिवेश बंद, सार्वजनिक सेवाओं का व्यापारीकरण और निजीकरण बंद किया जाए। आउटसोर्स, ठेका, कैजुअल, सेवा मित्र, मल्टी टास्क मजदूरों के रेगुलर रोजगार हेतु नीति बनाई जाए। मजदूरों की 12 घंटे की ड्यूटी, फिक्स टर्म रोजगार व महिलाओं को रात्रि शिफ्ट ड्यूटी के आदेश वापस लिए जाएं। स्मार्ट मीटर योजना वापस लो बिजली का निजीकरण बंद करो। 102 और 108 कर्मियों को नियमित किया जाए। स्ट्रीट वेंडर एक्ट को लागू करो।
देश भर में विभिन्न ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर कुल्लू जिले में भी देखने को मिला। विभिन्न विभागों और संगठनों से जुड़े ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह से ही कर्मचारी संगठनों के सदस्य ढालपुर चौक पर एकत्रित हुए, जहां से उन्होंने शहर में रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और झंडे लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान कर्मचारियों ने श्रम कानूनों में संशोधन, निजीकरण और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।
नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर पूर्ण रूप से पेन डाउन एवं टूल डाउन हड़ताल रही। कुल्लू में भोजनावकाश के दौरान बिजली बोर्ड कार्यालय के बाहर निजीकरण के विरोध में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। जिनमें कर्मचारियों, अभियंता, आउटसोर्स कर्मी और बिजली बोर्ड के पेंशनरों के साथ-साथ विद्युत उपभोक्ताओं ने भी भाग लिया। यह विरोध प्रदर्शन हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के कर्मचारियों, अभियंताओं, आउटसोर्स कर्मचारी और पेंशनभोगियों के संगठनों की संयुक्त कार्रवाई समिति के आह्वान पर पूरे प्रदेश में किया गया। स्थानीय संयुक्त कार्रवाई समिति ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्य सरकारों पर बिजली कंपनियों के निजीकरण के लिए दबाव बना रही है। इसी दिशा में बिजली कानून में कई संशोधन प्रस्तावित किए जा चुके हैं। हाल ही में ऊर्जा मंत्रालय द्वारा विद्युत संशोधन विधेयक, 2025 का मसौदा लाया गया है, जिसे वर्तमान बजट सत्र में संसद में पेश किए जाने की संभावना है।
सीटू, अखिल भारतीय किसान सभा सहित दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र क्षेत्रीय संघों के संयुक्त मंच के आह्वान पर रामपुर में केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी, किसान विरोधी, राष्ट्र विरोधी, कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में शामिल होकर रामपुर में एक विशाल रैली निकाली। कार्यकर्ताओं ने गौरा चौक से लेकर मुख्य बाजार रामपुर होते हुए एसडीएम कार्यालय तक यह रोष रैली निकाली।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिंघा और अन्य वक्ताओं ने कहा कि 21 नवंबर 2025 को चार लेबर कोड को लागू करने की अधिसूचना जारी करके देश भर के मजदूरों के खिलाफ मालिकों को खुली लूट करने के लिए मोदी सरकार ने मजदूरों को निहत्था कर दिया है। मजदूरों को रोजगार की गारंटी देने वाले मनरेगा कानून को खत्म करने के लिए लाए गए वीबी जीरामजी विधेयक से ग्रामीण रोजगार पर चोट कर किसानों की अर्थव्यवस्था पर हमला कर ग्रामीण रोजगार के अवसरों को खत्म कर दिया है। श्रम संहिताएं उचित विधि का पालन किए बिना, हितधारकों से परामर्श किए बिना और भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित किए बिना लागू की गईं, जो उन अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का उल्लंघन है और इन पर भारत एक राष्ट्र राज्य के रूप में हस्ताक्षरकर्ता है।
इन संहिताओं को संसद में जबरदस्ती पारित किया गया और तीन संहिताओं के मामले में तो संसद में पूर्ण विपक्ष की अनुपस्थिति में और कोविड-19 काल में आपदा प्रबंधन अधिनियम के बावजूद पारित किया गया। अधिसूचित श्रम संहिताएं और मसौदा नियम सामूहिक सौदेबाजी को कुचलने और हड़ताल के अधिकार को छीनने के लिए हैं। लगभग 70 प्रतिशत कारखाने श्रम कानून के दायरे से बाहर हो जाएंगे। श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा व्यावसायिक सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से वंचित हो जाएगा। कुल मिलाकर श्रम संहिताएं सरकार की ओर से श्रमिकों और उनके ट्रेड यूनियनों पर गुलामी की स्थिति थोपने के लिए सुनियोजित रूप से तैयार की गई हैं, ताकि उनके कॉरपोरेट आकाओं को मजदूरों, किसानों और आम जनता की लूट जारी रखने में मदद मिल सके।
विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन अधिनियम 2025 से बदलने से अधिकार आधारित रोजगार गारंटी खत्म हो जाती है, वित्तीय जिम्मेदारी राज्यों पर चली जाती है। सस्ते मजदूरों को सुनिश्चित करने के लिए फसल कटाई के मौसम में काम पर रोक लग जाती है और ग्रामीण संकट और गहरा हो जाता है। बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देने का फैसला प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, मसौदा बीज विधेयक और मसौदा बिजली विधेयक 2025 मिलकर कृषि, शिक्षा, बिजली उपभोक्ताओं और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों पर सीधा हमला करते हैं। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल बिगड़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी, लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर बढ़ते हमलों, अल्पसंख्यकों के खिलाफ ध्रुवीकरण और घृणा के विषैले अभियानों, सभी लोकतांत्रिक संस्थानों पर हमलों और उन्हें सत्तारूढ़ दल के अंधभक्तों से भरने की चिंताजनक स्थिति की पृष्ठभूमि में हो रही है, जिनका उद्देश्य संघ बनाने, अभिव्यक्ति और असहमति व्यक्त करने की स्वतंत्रता के अधिकारों को समाप्त करना है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जनता की जायज मांगों पर ध्यान देने के बजाय कॉरपोरेट जगत में अपने चहेतों के फायदे के लिए सभी वर्गों पर अपना हमला तेज कर रही है। इस हड़ताल के जरिए केंद्र सरकार मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं और नियमों को निरस्त करने, आंगनबाड़ी, आशा और एमडीएम समेत सभी योजन मजदूरों को नियमित करके उन्हें सरकारी कर्मचारी बनाने, बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक 2025 के मसौदे को वापस लेने, भारत के रूपांतरण के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास अधिनियम को वापस लेने, मगनरेगा को बहाल करने, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन एक्ट 2025 को निरस्त करने, बीमा कंपनियों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के फैसले को वापस लेने, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 वापिस लेने, सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र में खाली पदों को तुरंत भरा ने की मांग की है। इस मौके पर सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, नीलदत शर्मा, कामराज, संजीव जोशी, तिलक वर्मा, राजपाल, तिलक ठाकुर, राजकुमार, सतीश, आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन से बबली, रोमिला, मिड डे मील से राधा, कौशल्या, संगीता किसान सभा के जिलाध्यक्ष प्रेम कायथ, रणजीत ठाकुर, दयाल भाटनू, सुभाष सहित सैकड़ों मजदूर मौजूद रहे।
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