{"_id":"68a86cb0c30505d99e00cb1b","slug":"bhadrapad-amavasya-today-doshas-will-be-removed-by-worshipping-shani-shimla-news-c-19-sml1002-588896-2025-08-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: भाद्रपद अमावस्या आज\nशनि पूजा से दूर होंगे दोष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: भाद्रपद अमावस्या आज शनि पूजा से दूर होंगे दोष
विज्ञापन
सुबह 11:38 बजे तक पूजा का मुहूर्त
शनि देव की मूर्ति के पास जलाए तेल का दीया : नौटियाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। भाद्रपद अमावस्या 23 अगस्त शनिवार को पड़ रही है। इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाएगा। अमावस्या तिथि 22 अगस्त शुक्रवार सुबह 11:58 बजे आरंभ होगी और 23 अगस्त को शनिवार सुबह 11:38 बजे समाप्त होगी। इस दिन शनिदेव और पितरों की पूजा करने से पितर प्रसन्न होते हैं तथा शनि दोष से मुक्ति मिलती है।
शनि अमावस्या के दिन शनि देव की मूर्ति के पास तेल का दीया जलाने और तेल में काला तिल तथा साबुत उड़द की दाल डालना शुभ तथा फलदायी होता है। इस दिन पूजा करन से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति मिलती है। गंज बाजार के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि इस दिन धार्मिक कार्यों के लिए कुशा एकत्रित किए जाते हैं। पौराणिक ग्रंथों में इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या भी कहा गया है। यदि भाद्रपद अमावस्या सोमवार के दिन हो तो इस कुशा का उपयोग 12 सालों तक किया जा सकता है। पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि 23 अगस्त को सुबह 4:26 से 5:10 बजे तक स्नान-दान का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और बहते जल में तिल प्रवाहित करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन नदी के तट पर पिंडदान करना शुभ होता है। इसके साथ ही अपने पितरों के निमित्त ब्राह्मण भोज कराना भी शुभ होता। शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और अपने पितरों को स्मरण करें, साथ ही पीपल की सात परिक्रमा लगाएं।
विज्ञापन
शनि देव की मूर्ति के पास जलाए तेल का दीया : नौटियाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। भाद्रपद अमावस्या 23 अगस्त शनिवार को पड़ रही है। इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाएगा। अमावस्या तिथि 22 अगस्त शुक्रवार सुबह 11:58 बजे आरंभ होगी और 23 अगस्त को शनिवार सुबह 11:38 बजे समाप्त होगी। इस दिन शनिदेव और पितरों की पूजा करने से पितर प्रसन्न होते हैं तथा शनि दोष से मुक्ति मिलती है।
शनि अमावस्या के दिन शनि देव की मूर्ति के पास तेल का दीया जलाने और तेल में काला तिल तथा साबुत उड़द की दाल डालना शुभ तथा फलदायी होता है। इस दिन पूजा करन से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति मिलती है। गंज बाजार के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि इस दिन धार्मिक कार्यों के लिए कुशा एकत्रित किए जाते हैं। पौराणिक ग्रंथों में इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या भी कहा गया है। यदि भाद्रपद अमावस्या सोमवार के दिन हो तो इस कुशा का उपयोग 12 सालों तक किया जा सकता है। पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि 23 अगस्त को सुबह 4:26 से 5:10 बजे तक स्नान-दान का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और बहते जल में तिल प्रवाहित करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन नदी के तट पर पिंडदान करना शुभ होता है। इसके साथ ही अपने पितरों के निमित्त ब्राह्मण भोज कराना भी शुभ होता। शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और अपने पितरों को स्मरण करें, साथ ही पीपल की सात परिक्रमा लगाएं।
विज्ञापन