{"_id":"6abb6c5ce47445cdf70c64a2","slug":"major-vijay-singh-mankotia-demise-sarveen-chaudhary-shahpur-political-rivalry-2026-09-29","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हिमाचल: कभी चुनावी मैदान में आमने-सामने थे मनकोटिया-सरवीण, निधन पर सामने आईं पुरानी सियासी यादें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमाचल: कभी चुनावी मैदान में आमने-सामने थे मनकोटिया-सरवीण, निधन पर सामने आईं पुरानी सियासी यादें
Tue, 29 Sep 2026 01:17 PM IST
Ankesh Dogra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 29 Sep 2026 01:17 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन के बाद शाहपुर की राजनीति से जुड़ी उनकी पुरानी यादें एक बार फिर चर्चा में हैं। खासतौर पर पूर्व मंत्री सरवीण चौधरी के साथ उनका राजनीतिक मुकाबला लंबे समय तक क्षेत्र की सियासत का अहम हिस्सा रहा। दोनों नेता कई बार चुनावी मैदान में एक-दूसरे के सामने उतरे। समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और दोनों एक ही राजनीतिक मंच का हिस्सा भी बने।
विज्ञापन
मेजर विजय सिंह मनकोटिया और सरवीण चौधरी। फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन से हिमाचल की राजनीति में एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसमें बेबाक बयानबाजी, चुनावी मुकाबले और बदलते राजनीतिक समीकरणों की लंबी कहानी जुड़ी रही। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीति का सबसे चर्चित पहलू उनके और पूर्व मंत्री सरवीण चौधरी के बीच रहा चुनावी मुकाबला भी था।
विज्ञापन
एक समय दोनों नेता शाहपुर की सियासत में आमने-सामने की राजनीति के प्रमुख चेहरे माने जाते थे। विधानसभा चुनावों में दोनों के बीच मुकाबला क्षेत्र की राजनीतिक चर्चा का केंद्र रहता था। बाद के वर्षों में राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और दोनों नेताओं के राजनीतिक रास्ते एक मंच तक भी पहुंचे।
विज्ञापन
विज्ञापन
शाहपुर में लंबे समय तक रहा प्रभाव
मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने शाहपुर से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और कई बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। सेना में सेवा देने के बाद राजनीति में आए मनकोटिया ने अपने स्पष्ट और बेबाक अंदाज से प्रदेश की राजनीति में अलग पहचान बनाई। शाहपुर में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह कई चुनावों में यहां से जीतकर विधानसभा पहुंचे और प्रदेश सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने शाहपुर से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और कई बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। सेना में सेवा देने के बाद राजनीति में आए मनकोटिया ने अपने स्पष्ट और बेबाक अंदाज से प्रदेश की राजनीति में अलग पहचान बनाई। शाहपुर में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह कई चुनावों में यहां से जीतकर विधानसभा पहुंचे और प्रदेश सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।
चुनावी मुकाबले ने बनाई अलग पहचान
सरवीण चौधरी भी शाहपुर की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय और प्रभावशाली चेहरा रही हैं। दोनों नेताओं के बीच चुनावी मुकाबले ने क्षेत्र की राजनीति को कई बार दिलचस्प मोड़ दिया। 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में दोनों के बीच मुकाबला हुआ। इन चुनावों में सरवीण चौधरी ने जीत दर्ज की, जबकि मनकोटिया को हार का सामना करना पड़ा। 2017 के चुनाव में मनकोटिया दूसरे स्थान पर रहे। राजनीति में यह मुकाबला केवल चुनाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शाहपुर के राजनीतिक समीकरणों को समझने के लिए दोनों नेताओं की भूमिका लंबे समय तक महत्वपूर्ण मानी जाती रही।
सरवीण चौधरी भी शाहपुर की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय और प्रभावशाली चेहरा रही हैं। दोनों नेताओं के बीच चुनावी मुकाबले ने क्षेत्र की राजनीति को कई बार दिलचस्प मोड़ दिया। 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में दोनों के बीच मुकाबला हुआ। इन चुनावों में सरवीण चौधरी ने जीत दर्ज की, जबकि मनकोटिया को हार का सामना करना पड़ा। 2017 के चुनाव में मनकोटिया दूसरे स्थान पर रहे। राजनीति में यह मुकाबला केवल चुनाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शाहपुर के राजनीतिक समीकरणों को समझने के लिए दोनों नेताओं की भूमिका लंबे समय तक महत्वपूर्ण मानी जाती रही।
समय के साथ बदले राजनीतिक समीकरण
मेजर मनकोटिया का राजनीतिक सफर कई दलों और अलग-अलग राजनीतिक दौर से होकर गुजरा। उन्होंने अलग-अलग समय में विभिन्न राजनीतिक मंचों पर काम किया। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा। इस तरह राजनीति का वह दौर भी आया जब कभी चुनावी मैदान में एक-दूसरे के सामने रहने वाले नेता एक ही राजनीतिक परिवार का हिस्सा बन गए। यही बदलते राजनीतिक समीकरण हिमाचल की राजनीति की खासियत भी रहे हैं।
मेजर मनकोटिया का राजनीतिक सफर कई दलों और अलग-अलग राजनीतिक दौर से होकर गुजरा। उन्होंने अलग-अलग समय में विभिन्न राजनीतिक मंचों पर काम किया। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा। इस तरह राजनीति का वह दौर भी आया जब कभी चुनावी मैदान में एक-दूसरे के सामने रहने वाले नेता एक ही राजनीतिक परिवार का हिस्सा बन गए। यही बदलते राजनीतिक समीकरण हिमाचल की राजनीति की खासियत भी रहे हैं।
बेबाक अंदाज हमेशा रहा चर्चा में
मेजर मनकोटिया अपने स्पष्ट और बेबाक राजनीतिक अंदाज के लिए जाने जाते थे। प्रदेश की राजनीति में उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उनके राजनीतिक जीवन में कई ऐसे मौके आए जब उनके बयानों और रुख को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हुईं। वीरभद्र सिंह के साथ उनके राजनीतिक मतभेद भी हिमाचल की राजनीति के चर्चित अध्यायों में शामिल रहे। इसके बावजूद मनकोटिया लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और शाहपुर के लोगों के बीच उनकी राजनीतिक पहचान बनी रही।
मेजर मनकोटिया अपने स्पष्ट और बेबाक राजनीतिक अंदाज के लिए जाने जाते थे। प्रदेश की राजनीति में उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उनके राजनीतिक जीवन में कई ऐसे मौके आए जब उनके बयानों और रुख को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हुईं। वीरभद्र सिंह के साथ उनके राजनीतिक मतभेद भी हिमाचल की राजनीति के चर्चित अध्यायों में शामिल रहे। इसके बावजूद मनकोटिया लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और शाहपुर के लोगों के बीच उनकी राजनीतिक पहचान बनी रही।
निधन से शाहपुर में शोक
मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन की खबर के बाद शाहपुर और कांगड़ा में शोक का माहौल है। राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और क्षेत्र से उनके जुड़ाव को याद कर रहे हैं। उनके निधन के साथ शाहपुर की राजनीति का एक पुराना और प्रभावशाली चेहरा हमेशा के लिए विदा हो गया। उनके राजनीतिक जीवन की यादों में चुनावी प्रतिद्वंद्विता, बेबाक राजनीति और समय के साथ बदलते सियासी रिश्तों की कहानी लंबे समय तक चर्चा में रहेगी।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन की खबर के बाद शाहपुर और कांगड़ा में शोक का माहौल है। राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और क्षेत्र से उनके जुड़ाव को याद कर रहे हैं। उनके निधन के साथ शाहपुर की राजनीति का एक पुराना और प्रभावशाली चेहरा हमेशा के लिए विदा हो गया। उनके राजनीतिक जीवन की यादों में चुनावी प्रतिद्वंद्विता, बेबाक राजनीति और समय के साथ बदलते सियासी रिश्तों की कहानी लंबे समय तक चर्चा में रहेगी।