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अब बेहद खास तकनीक से होगी बंदरों की गिनती
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 12 Jul 2015 09:34 AM IST
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बंदरों को गिनने के लिए हिमाचल में पहली बार हेड काउंटिंग की जगह नई बीट ट्रैक विधि प्रयोग में लाई गई है। ऐसा करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य भी बन गया है। तीन दिन के सर्वे के बाद इसी महीने 5 जुलाई को फॉरेस्ट गार्डों ने रेंज अफसरों को डाटा सौंपा है।
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बंदरों की इस वैज्ञानिक गणना के सभी नतीजे सोमवार तक सीसीएफ तक पहुंचेंगे, जिन्हें 17 जुलाई तक पीसीसीएफ कार्यालय को मुहैया करा दिया जाएगा। वन विभाग के अफसरों का दावा है कि किसी भी राज्य में इस तकनीक का प्रयोग पहली बार किया जा रहा है। इसके बाद वैज्ञानिक जम्मू-कश्मीर में इस तकनीक की मदद से बंदरों की गणना करेंगे।
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अफसरों की मानें तो इस तकनीक के प्रयोग से अधिक सही डाटा मिलने की उम्मीद है। इससे पहले परंपरागत विधि से लिए गए आंकड़ों में दोहराव की समस्या बनी रहती थी। इस दफा बंदरों की गणना के लिए बीट में तीन ट्रैक इस्तेमाल किए गए थे। अलग-अलग वक्त, अलग-अलग दलों ने अलग-अलग जगहों पर बंदरों को स्पॉट किया।
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अब मैपिंग का कार्य चल रहा है। तकनीक के बेहतर प्रयोग और सॉफ्टवेयर में डाटा फीड करने के लिए विशेषज्ञ बंगलूरू से हिमाचल पहुंचे हैं। बंदरों की मैपिंग का फार्मेट भी इस बार अलग है। इसके लिए शहर, गांव, जंगल, मंदिर और सड़क किनारे यह पांच स्पॉट अलग से दिए गए हैं। बंदरों को भी मेल, फीमेल, नवजात में बांटकर मैपिंग की जा रही है।
बीट ट्रैक से बंदरों की गणना पहली बार की जा रही है। यह वैज्ञानिक विधि है। इससे इस जानवर की सही संख्या का पता लगाया जा सकना अधिक संभव होगा। रिसर्च करने वालों को फायदा होगा। साथ ही योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में भी सही डाटा इस्तेमाल में आएगा। -एआरएम रेड्डी, मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ), वन्य जीव