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Shimla News: चालान के भुगतान करते समय रहें सावधान, हो सकती है ठगी
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फर्जी वेबसाइट के जरिये शातिर लगा रहे चूना
घणाहट्टी के एक व्यक्ति से हो चुकी है ठगी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। साइबर ठग अब ऑनलाइन चालान के भुगतान के नाम पर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इंटरनेट पर चालान भुगतान के नाम से कई फर्जी वेबसाइट और लिंक सक्रिय हैं। इनके जरिये लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऐसा ही मामला घणाहट्टी निवासी राकेश ठाकुर के साथ सामने आया है।
राकेश ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2024 में उनकी स्कूटी का आइडल पार्किंग का एक हजार रुपये का चालान हुआ था। उन्होंने उसी वर्ष ऑनलाइन माध्यम से इसका भुगतान किया था। वर्ष 2025 में ऑनलाइन चेक करने पर स्कूटी नंबर पर कोई चालान नहीं दिखा। हालांकि, वर्ष 2026 में दोबारा चालान लंबित दिखाई देने लगा। इसके बाद उन्होंने इंटरनेट पर मिले लिंक के जरिये फिर भुगतान किया। इस बार देरी के साथ चालान की राशि 1245 रुपये थी। कुछ समय बाद जब चालान दोबारा लंबित दिखाई दिया तो उन्होंने कोर्ट जाकर जानकारी ली। वहां पता चला कि उनके चालान का अब तक भुगतान ही नहीं हुआ था। इसके बाद उन्होंने मौके पर एक हजार रुपये जमा कर चालान का भुगतान किया। इस तरह फर्जी वेबसाइट के झांसे में आने के कारण एक हजार रुपये के चालान के लिए उन्हें तीन बार में 3245 रुपये चुकाने पड़े। इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। साइबर क्राइम सेल और पुलिस की ओर से समय-समय पर लोगों को ऑनलाइन चालान के नाम पर सक्रिय फर्जी वेबसाइट और लिंक से सावधान रहने की अपील की जाती है। इसके बावजूद लोग इनके झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं।
यह बरतें सावधानियां
एसएमएस या व्हाट्सएप संदेश में आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
संदेश के जरिये आई किसी भी एपीके फाइल को फोन में डाउनलोड न करें।
चालान चेक करने के लिए आधिकारिक ई-चालान पोर्टल का पता ब्राउजर में स्वयं टाइप करें।
वाहन संबंधी जानकारी के लिए केवल गूगल प्ले स्टोर या एप्पल एप स्टोर से आधिकारिक एमपरिवहन एप डाउनलोड करें।
किसी अनजान वेबसाइट या पेज पर बैंक विवरण, पिन या ओटीपी दर्ज न करें।
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घणाहट्टी के एक व्यक्ति से हो चुकी है ठगी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। साइबर ठग अब ऑनलाइन चालान के भुगतान के नाम पर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इंटरनेट पर चालान भुगतान के नाम से कई फर्जी वेबसाइट और लिंक सक्रिय हैं। इनके जरिये लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऐसा ही मामला घणाहट्टी निवासी राकेश ठाकुर के साथ सामने आया है।
राकेश ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2024 में उनकी स्कूटी का आइडल पार्किंग का एक हजार रुपये का चालान हुआ था। उन्होंने उसी वर्ष ऑनलाइन माध्यम से इसका भुगतान किया था। वर्ष 2025 में ऑनलाइन चेक करने पर स्कूटी नंबर पर कोई चालान नहीं दिखा। हालांकि, वर्ष 2026 में दोबारा चालान लंबित दिखाई देने लगा। इसके बाद उन्होंने इंटरनेट पर मिले लिंक के जरिये फिर भुगतान किया। इस बार देरी के साथ चालान की राशि 1245 रुपये थी। कुछ समय बाद जब चालान दोबारा लंबित दिखाई दिया तो उन्होंने कोर्ट जाकर जानकारी ली। वहां पता चला कि उनके चालान का अब तक भुगतान ही नहीं हुआ था। इसके बाद उन्होंने मौके पर एक हजार रुपये जमा कर चालान का भुगतान किया। इस तरह फर्जी वेबसाइट के झांसे में आने के कारण एक हजार रुपये के चालान के लिए उन्हें तीन बार में 3245 रुपये चुकाने पड़े। इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। साइबर क्राइम सेल और पुलिस की ओर से समय-समय पर लोगों को ऑनलाइन चालान के नाम पर सक्रिय फर्जी वेबसाइट और लिंक से सावधान रहने की अपील की जाती है। इसके बावजूद लोग इनके झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं।
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यह बरतें सावधानियां
एसएमएस या व्हाट्सएप संदेश में आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
संदेश के जरिये आई किसी भी एपीके फाइल को फोन में डाउनलोड न करें।
चालान चेक करने के लिए आधिकारिक ई-चालान पोर्टल का पता ब्राउजर में स्वयं टाइप करें।
वाहन संबंधी जानकारी के लिए केवल गूगल प्ले स्टोर या एप्पल एप स्टोर से आधिकारिक एमपरिवहन एप डाउनलोड करें।
किसी अनजान वेबसाइट या पेज पर बैंक विवरण, पिन या ओटीपी दर्ज न करें।