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बैंकों की दुर्दशा के लिए केंद्र सरकार है जिम्मेवार
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bank strik in shimla
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बैंकों की दुर्दशा के लिए केंद्र सरकार है जिम्मेवार
हड़ताल पर उतरे बैंक कर्मियों का आरोप
बोर्ड और सरकार की मंजूरी के बाद दिए करोड़ों के ऋण
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। देश में बैंकों की दुर्दशा के लिए केंद्र सरकार जिम्मेवार है। बड़े-बड़े कारपोरेट को बैंकों की ब्रांच या मुख्य कार्यालय से नहीं बल्कि बोर्ड और सरकार की मंजूरी से करोड़ों के ऋण दिए गए हैं। बजट में सरकार ने दो पब्लिक सेक्टर बैंकों के निजीकरण के एलान किया है। बैंकों को कारपोरेट के हाथों बेचने की तैयारी है जबकि निजीकरण के स्थान पर एक लाख 75 हजार करोड़ जुटाने के लिए डिफल्टर कारपोरेट के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को शिमला में उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के प्रतिनिधियों ने यह बात की। फोरम के अध्यक्ष नरेंद्र चौहान और संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार बैंकों का निजीकरण कर चंद पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है। बैंकों के निजीकरण का आम लोगों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा। नए कर्मियों की भर्ती में भाई भतीजावाद होगा। बड़े पैमाने पर छंटनी होगी जिससे बैंक कर्मियों की नौकरियां चली जाएंगी। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले9 यूनियनों के कर्मी दो दिवसीय हड़ताल पर रहे। प्रदर्शन में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के दिनेश शर्मा, विकल्प शर्मा, मालती शर्मा, यूको बैंक के पार्थ शर्मा और दीपक कुमार, यूएफबीयू के उपाध्यक्ष अभिमन्यु खोसला, एसबीआईएसए के एमएस वर्मा, पीएनबी शिमला के नरेंद्र शर्मा, एआईबीईए के नरेंद्र वर्मा, यूको बैंक से पीयूष, बैंक ऑफ बड़ौदा से सुशील शर्मा और यूको बैंक से दीक्षांत सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
नहीं मानी सरकार तो होगी अनिश्चितकालीन हड़ताल
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के अध्यक्ष नरेंद्र चौहान ने बताया कि बैंक कर्मियों की हड़ताल पूरी तरह कामयाब रही है। फोरम की नेशनल बॉडी की बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति तय होगी। केंद्र सरकार अगर बैंकों के निजीकरण की नीति नहीं छोड़ती तो अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया जाएगा।
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हड़ताल पर उतरे बैंक कर्मियों का आरोप
बोर्ड और सरकार की मंजूरी के बाद दिए करोड़ों के ऋण
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। देश में बैंकों की दुर्दशा के लिए केंद्र सरकार जिम्मेवार है। बड़े-बड़े कारपोरेट को बैंकों की ब्रांच या मुख्य कार्यालय से नहीं बल्कि बोर्ड और सरकार की मंजूरी से करोड़ों के ऋण दिए गए हैं। बजट में सरकार ने दो पब्लिक सेक्टर बैंकों के निजीकरण के एलान किया है। बैंकों को कारपोरेट के हाथों बेचने की तैयारी है जबकि निजीकरण के स्थान पर एक लाख 75 हजार करोड़ जुटाने के लिए डिफल्टर कारपोरेट के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को शिमला में उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के प्रतिनिधियों ने यह बात की। फोरम के अध्यक्ष नरेंद्र चौहान और संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार बैंकों का निजीकरण कर चंद पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है। बैंकों के निजीकरण का आम लोगों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा। नए कर्मियों की भर्ती में भाई भतीजावाद होगा। बड़े पैमाने पर छंटनी होगी जिससे बैंक कर्मियों की नौकरियां चली जाएंगी। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले9 यूनियनों के कर्मी दो दिवसीय हड़ताल पर रहे। प्रदर्शन में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के दिनेश शर्मा, विकल्प शर्मा, मालती शर्मा, यूको बैंक के पार्थ शर्मा और दीपक कुमार, यूएफबीयू के उपाध्यक्ष अभिमन्यु खोसला, एसबीआईएसए के एमएस वर्मा, पीएनबी शिमला के नरेंद्र शर्मा, एआईबीईए के नरेंद्र वर्मा, यूको बैंक से पीयूष, बैंक ऑफ बड़ौदा से सुशील शर्मा और यूको बैंक से दीक्षांत सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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नहीं मानी सरकार तो होगी अनिश्चितकालीन हड़ताल
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के अध्यक्ष नरेंद्र चौहान ने बताया कि बैंक कर्मियों की हड़ताल पूरी तरह कामयाब रही है। फोरम की नेशनल बॉडी की बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति तय होगी। केंद्र सरकार अगर बैंकों के निजीकरण की नीति नहीं छोड़ती तो अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया जाएगा।
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