भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए बनाई नई व्यवस्था पर रोक, आयोग ने पलटा अपना फैसला
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अब पहले की तरह लिखित परीक्षा के अंक मेरिट में शामिल नहीं किए जाएंगे। इंटरव्यू के अंक ही सर्वोपरि होंगे। राज्य लोकसेवा आयोग ने लिखित परीक्षा के 65 और इंटरव्यू के 35 फीसदी अंकों से नौकरियों के लिए चयन करने का फैसला लिया था। सरकारी विभागों में क्लास वन और टू की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए यह नई व्यवस्था की गई थी। आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल डीवीएस राणा ने नौकरियों में लगने वाले भाई-भतीजावाद के आरोपों को समाप्त करने के लिए इस नई व्यवस्था को लागू करने का एलान किया था।
नई व्यवस्था के तहत हर लिहाज से पात्र व्यक्ति का ही चयन होने की बात कही गई थी लेकिन, अब इस महत्वपूर्ण फैसले पर रोक लगा दी गई है। राज्य लोकसेवा आयोग ने मई और जुलाई में हुई बैठकों में लिए गए नई व्यवस्था के फैसले को रोकने को लेकर कार्यालय से आदेश जारी किया है। सूत्र बताते हैं कि सरकार की ओर से इस नई व्यवस्था पर आपत्तियां जताई गई थीं।
नई व्यवस्था पर कुछ समय के लिए लगाई है रोक
भर्ती प्रक्रिया के लिए बनाई गई नई व्यवस्था पर कुछ समय के लिए रोक लगाई गई है। इसे लेकर आयोग को कई सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। इन पर विस्तार से चर्चा करने के लिए रोक लगाई गई है।-मेजर जनरल डीवीएस राणा, लोकसेवा आयोग अध्यक्ष
जिन पदों के लिए आरएंडपी स्पष्ट नहीं थे, वहां लागू होनी थी नई व्यवस्था
नई व्यवस्था ऐसे पदों की भर्ती के लिए गई की थी जहां आरएंडपी नियम स्पष्ट नहीं थे। इसके अलावा बोर्डों, निगमों के विभिन्न पदों सहित डॉक्टरों, कृषि विकास अधिकारी, बागवानी विकास अधिकारी, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट इंजीनियरों के पदों की भर्ती भी नई तरीके से होनी थी।
इंटरव्यू के अंक बराबर होने पर ही देखेंगे लिखित परीक्षा के नंबर
अब पहले की तरह इंटरव्यू के अंक बराबर होने की स्थिति में ही लिखित परीक्षा के अंक देखे जाएंगे। जिस अभ्यर्थी के लिखित परीक्षा में अंक अधिक होंगे, उसे ही नौकरी देने के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। चयन प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलाव एचएएस, वन सेवाएं, एलाइड सेवाएं, नायब तहसीलदार और न्यायिक सेवा की भर्ती पर लागू नहीं होनी थी।