जिसे दाखिला नहीं मिला, उसे मिला पदमश्री
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जिस व्यक्ति को पपरोला आयुर्वेदिक संस्थान में कम नंबरों के कारण दाखिला नहीं मिल सका था, उसी व्यक्ति ने सबसे कम उम्र में पद्मश्री हासिल किया।
पपरोला कालेज में आयोजित नेशनल कांफ्रेंस में विशेष मेहमान के तौर पर आए डा. बालेंद्र प्रकाश (पद्मश्री) ने 1978 में पपरोला आयुर्वेदिक कालेज में एडमिशन के लिए आवेदन किया था। लेकिन 48 प्रतिशत अंक होने के कारण उनका दाखिला नहीं हो सका और वे मायूस हो गए।
बाद में उन्होंने इसी वर्ष दिल्ली में घनवंतरी कालेज में एडमिशन ले ली और एक वर्ष के बाद एमडी विश्वविद्यालय रोहतक के लिए माईग्रेट हो गए। 1985 में उन्होंने मेरठ में निजी प्रेक्टिस शुरू कर दी और 1989 में देहरादून शिफ्ट हो गए। पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायण के साथ रहे।
1999 में किए गए थे सम्मानित
पिता वैध चंद प्रकाश से उन्होंने बहुत कुछ सीखा और जीवन में अपनाया। 1999 में सबसे कम उम्र (39 वर्ष) में उन्हे कैंसर जैसी बीमारी पर रिसर्च करने व आयुर्वेद के तरीके से अन्य बीमारियों के लिए नई दवाइयां ईजाद करने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
डा. बालेंद्र वर्तमान में कैंसर रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमेन, इपका लैबोरेट्री और अन्य संस्थानों में अहम पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। कैंसर, बच्चों में अस्थमा, माईग्रेन, लीवर डिशआॅर्डर, अनीमिया जैसी बीमारियों के लिए नया इलाज इजाद करने में सफल रहे हैं।
डा. बालेंद्र प्रकाश ने अमर उजाला को बताया कि उनका अगला उद्देश्य इसी क्षेत्र में रिसर्च करते हुए नोबल प्राइज प्राप्त करना है। उनका मानना है कि इस कांफ्रेंस से प्रदेश व देश में आयुर्वेद को बढ़ावा देने की नई सोच व तरीका मिलेगा।