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Shimla News: हमले के मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज

Fri, 24 Apr 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 24 Apr 2026 11:59 PM IST
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Bail pleas of two accused in assault case rejected
सीएम के मीडिया सलाहकार के बेटे पर हमले का है आरोप
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कोर्ट ने कहा, आरोप गंभीर, अभी नहीं दे सकते जमानत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार के बेटे आर्यन चौहान पर हमला करने वाले दो आरोपियों की अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं जिनमें हथियारों से धमकी देकर अपहरण और लूट का प्रयास शामिल है। इसको देखते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-द्वितीय यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने मनमोहन उर्फ अनु और राजिंदर कुमार उर्फ राजू की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। दोनों आरोपी शिमला के मशोबरा में 20 मार्च 2026 को हिमाचल के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान के बेटे आर्यन चौहान पर हुए हमले के मामले में गिरफ्तार हैं।
जानकारी के मुताबिक 20 मार्च को दोपहर करीब 1:25 बजे आर्यन चौहान अपनी कार एचपी 63 सी 2626 से शिमला लौट रहे थे। मशोबरा के पास एक निजी होटल से करीब 200 मीटर पहले एक सफेद रंग की ऑल्टो कार ने उन्हें रोका। कार से दो व्यक्ति मास्क और कैप पहने उतरे। इसमें एक के पास पिस्तौल और दूसरे के पास लोहे की रॉड थी। आरोपियों ने उन्हें गोली मारने की धमकी दी और पैसे लूटने की कोशिश की। आर्यन अपनी जान बचाने के लिए पहाड़ी से नीचे कूद गए जिसमें उनके पैर और शरीर पर चोटें आईं। उन्होंने होटल पहुंचकर पुलिस को सूचना दी। पीड़ित ने बताया कि आरोपी वाहन का नंबर एचपी 58 से शुरू होता है। जांच में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और डंप डाटा से वाहन की पहचान की जो चरणजीत सिंह उर्फ बिट्टू का था।
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आरोप है कि घटना के दिन ताशी ड्राइवर था, मनमोहन उसके बगल में बैठा था जबकि मनीश वर्मा और राजिंदर कुमार उर्फ राजू (जमानत याचिकाकर्ता) पीछे की सीट पर थे। मनीश और राजू हथियारों से लैस थे। पुलिस ने इस संबंध में थाना ढली में केस दर्ज किया है। अदालत ने राज्य की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर गौर किया। जांच एजेंसी ने बताया कि अपराध में इस्तेमाल हथियार अभी बरामद नहीं हुआ है और आगे की जांच चल रही है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, जिनमें हथियारों से धमकी देकर अपहरण और लूट का प्रयास शामिल है और प्रथम दृष्टया सबूत मौजूद हैं। यदि जमानत दी तो आरोपी सबूतों से छेड़छाड़, गवाहों को प्रभावित करने या फरार होने की आशंका है। जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह ने कहा कि आरोपी स्पष्ट रूप से जमानत का हकदार नहीं हैं, इसलिए दोनों याचिकाएं खारिज की जाती हैं। फैसला खुली अदालत में सुनाया गया।
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