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बद्दी: पेपर मिलों की मनमानी से गत्ता उद्योग पर संकट

Tue, 15 Jun 2021 02:11 PM IST
Krishan Singh ओमपाल सिंह, अमर उजाला, बद्दी (सोलन)
ओमपाल सिंह, अमर उजाला, बद्दी (सोलन) Published by: Krishan Singh Updated Tue, 15 Jun 2021 02:11 PM IST
सार

मौजूदा दौर में प्रदेश में 250 गत्ता उद्योग हैं। ये उद्योग प्रति वर्ष साढ़े चार करोड़ गत्ते के डिब्बे तैयार कर सेब उत्पादकों को सप्लाई
करते हैं। गत्ता उद्योगों को पिछले वर्ष 21 रुपये प्रति किलो पेपर मिल रहा था।

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Baddi: Crisis on cardboard industry due to paper mills
उद्योग(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के गत्ता उद्योगों को इस वर्ष सेब सीजन से भी हाथ धोना पड़ेगा। गत्ते के लगातार दाम बढने से प्रदेशसरकार ने गत्ते के डिब्बे के स्थान पर प्लास्टिक के क्रेट और प्लास्टिक के बोरी का प्रयोग करने का फैसला लिया है। पेपर मिलों ने पेपर के दाम बढ़ा दिए हैं। जिससे गत्ता उत्पादकों ने डिब्बे के 30 फीसदी दाम बढ़ाए हैं। वहीं, सरकार ने सेब उत्पादकों के लिए गत्ते का विकल्प देखना शुरू कर दिया है। 

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मौजूदा दौर में प्रदेश में 250 गत्ता उद्योग हैं। ये उद्योग प्रति वर्ष साढ़े चार करोड़ गत्ते के डिब्बे तैयार कर सेब उत्पादकों को सप्लाई करते हैं। गत्ता उद्योगों को पिछले वर्ष 21 रुपये प्रति किलो पेपर मिल रहा था। वह अब 34 से 36 रुपये तक मिल रहा है। जिससे गत्ता संचालकों ने गत्ते के 30 फीसदी दाम बढ़ा दिए हैं। लगातार गत्ते के दाम बढ़ने से सरकार ने सेब उत्पादकों को राहत देने के लिए इसके विकल्प खोजने शुरू कर दिए और सरकार ने इसके स्थान पर प्लॉस्टिक के क्रेट तैयार करने का फैसला लिया है। अगर यह योजना सिरे चढ़ती है तो साढ़े चार करोड़ डिब्बे तैयार करने वाला गत्ता उद्योग जगत एक करोड़ तक ही सीमित रह सकता है। लगातार पेपर के दाम बढ़ने से पहले ही डेढ़ दर्जन गत्ता उद्योग बंद हो गए हैं। 
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गत्ता उद्योगों पर मंडराए खतरे के बादल: जैन
गत्ता उद्योग संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने कहा कि सरकार अब गत्ते के डिब्बे के स्थान पर प्लास्टिक के क्रेट का प्रयोग करने जा रही है। जिससे अब संबंधित उद्योगों पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। सेब सीजन ही उनकी पूरे साल की मंदी को दूर करता है, लेकिन अब वह भी पेपर मिलों की मनमानी से छिन जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर गत्ता उद्योग बंद होते हैं तो पेपर मिलों ने जो भी डीलरों के माध्यम से माल सप्लाई कर पैसा लगाया हुआ है, वह इन उद्योगों के डिफॉल्टर होने से डूब सकता है।

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