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हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की प्रतीक है बाबा फजलशाह की दरगाह, पढ़ें पूरा मामला
Sun, 10 Nov 2019 04:14 AM IST
Krishan Singh
महेश कपिल, अमर उजाला, नादौन (हमीरपुर)
महेश कपिल, अमर उजाला, नादौन (हमीरपुर)
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 10 Nov 2019 04:14 AM IST
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ऐतिहासिक बाबा फजलशाह दरगाह
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल के जिला हमीरपुर के उपमंडल नादौन में ऐतिहासिक बाबा फजलशाह दरगाह हिंदू और मुसलमान के भाईचारे का प्रतीक बन गई है। इस दरगाह का रखरखाव एक हिंदू परिवार कर रहा है। ग्राम पंचायत भरमोटी में बनी बाबा फजल शाह की दरगाह लगभग 200 वर्ष पुरानी है जिसका रखरखाव वहीं पर रहने वाला भाग देवी का परिवार कर रहा है।
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भाग देवी ने बताया कि आजादी के समय 1947 में इस दरगाह में की गई तोड़फोड़ के बाद इसकी दशा बहुत खराब हो गई थी। भाग देवी और इनके तीनों बेटे सुरेंद्र कुमार, राज कुमार, रमेश कुमार यहीं पर रहते हैं। उन्होंने बताया कि हर गुरुवार को यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख समेत सभी धर्मों के लोग माथा टेकने आते हैं और यह दरगाह पीर बाबा के नाम से प्रसिद्ध है। बताया जाता है कि यहां पर एक बाबा ग्रामीणों को मिलते रहते थे।
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रात के समय घना और सुनसान जंगल होने के कारण कई बार बाबा ने लोगों को उनके घर पहुंचाया। एक ग्रामीण महिला जो कबीरपंथी थी, उसको सपने में इस दरगाह के बारे में बुजुर्ग बाबा ने बताया जिसके बाद उस महिला ने ग्रामीणों को दरगाह और बाबा की जानकारी दी। उस समय दरगाह के पास घर में भाग देवी का परिवार पूजा करता था। धीरे-धीरे यहां काफी संख्या में लोग पहुंचना शुरू हो गए। यह हिंदू परिवार लगभग 77 वर्षों से इस दरगाह की रखरखाव और देखरेख कर रहा है।
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