आयुर्वेदिक डॉक्टरों ने अंग्रेजी दवाइयां लिखीं तो होगी कार्रवाई
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हिमाचल प्रदेश के आयुर्वेदिक अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सक अब अंग्रेजी दवाइयां (ऐलोपैथिक) नहीं लिख सकेंगे। यदि किसी चिकित्सक ने मरीज को एलोपैथिक दवाइयां लिखीं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ऐसी कंडीशन जब, मरीज को एलोपैथिक दवाइयां देनी जरूरी हो, तो डॉक्टर लिख सकता है, लेकिन इसकी पूरी वजह उस चिकित्सक को बतानी होगी।
आयुर्वेदिक विभाग आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए यह व्यवस्था करने जा रहा है। औषधीय पौधों के रोपण के लिए किसानों को जागरूक करने के साथ ही अस्पतालों में प्राचीनतम योग पद्धति से भी रोगियों का इलाज जल्द शुरू किया जाएगा।
सिरमौर दौरे पर आए आयुर्वेदिक विभाग के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी)डॉ. दिनेश कुमार ने अमर उजाला से खास मुलाकात में यह खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक विभाग के अधिकतर संस्थान ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में जड़ी-बूटियों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे।
पंचकर्मा और श्रारसूत्र के साथ शुरू होगी योग से इलाज की पद्धति
30 से 70 प्रतिशत अनुदान मुहैया करवाकर किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में योग की पद्धति से रोगियों का इलाज शुरू किया जाएगा। इसके लिए मेडिकल अफसर को योग की ट्रेनिंग दी जाएगी। नाहन में जल्द ही यह सेवा शुरू की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक अस्पतालों में एलोपैथिक दवाइयां यदि कोई चिकित्सक लिखता है तो उस पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की पर्ची कोई मरीज विभाग को मुहैया करवा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई मरीज अत्यंत विकट स्थिति में है और तुरंत उसे एलोपैथिक दवाई की जरूरत है तो ही डॉक्टर ऐसी दवाइयां लिख सकेगा, लेकिन, वक्त आने पर यदि इसकी जांच हुई तो चिकित्सक को इसका कारण भी तथ्य सहित बताना होगा।
राज्य में औषधीय पौधों को बढ़ावा देने के लिए खास अभियान चलाया जा रहा है। एक जुलाई को औषधि पादप महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान राज्य में औषधीय पौधों को रोपण किया जाएगा। खास यह है कि इस महोत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री के हाथों करवाया जाएगा।