फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Avishan breed of sheep will change the fate of cattle farmers, gives six lambs in a year

Mandi News: पशुपालकों की तकदीर बदलेगी अविशान नस्ल की भेड़, एक साल में देती है छह मेमने

Thu, 02 Nov 2023 11:07 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Thu, 02 Nov 2023 11:07 AM IST
सार

प्रदेश में इस प्रजाति की भेड़ सरकाघाट के मसेरन पंचायत के पशुपालकों के लिए खूब फायदेमंद साबित हो रही है। गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में इस प्रजाति की भेड़ से पशुपालक मालामाल हो रहे हैं। 

विज्ञापन
Avishan breed of sheep will change the fate of cattle farmers, gives six lambs in a year
अविशान नस्ल की भेड़। - फोटो : संवाद

विस्तार

आय बढ़ाने के लिए भेड़ पालन बहुत बेहतर व्यवसाय माना जाता है और देश ही नहीं हिमाचल में भी बहुत से लोग इस व्यवसाय से खूब पैसे कमा रहे हैं। इस व्यवसाय में अविशान नस्ल की भेड़ अब पशुपालकों की तकदीर बदलने वाली है। प्रदेश में इस प्रजाति की भेड़ सरकाघाट के मसेरन पंचायत के पशुपालकों के लिए खूब फायदेमंद साबित हो रही है। गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में इस प्रजाति की भेड़ से पशुपालक मालामाल हो रहे हैं। अब हिमाचल में भी यह भेड़ रास आ रही है। यहां की जलवायु इसके लिए बेहतर साबित हो रही है। एक साल में इस भेड़ से चार से छह मेमने मिल रहे हैं। करीब 25 हजार रुपये भेड़ का एक-एक मेमना छह हजार रुपये में बिक जाता है और पशुपालक हजारों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं।

विज्ञापन


 यह प्रजाति केंद्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान अविकाशनगर राजस्थान में तैयार की गई है। इस नस्ल को राजस्थान की स्थानीय नस्ल मालपुरा, पश्चिम बंगाल की गैरोल और गुजरात की पाटनवाड़ी से संकरण से तैयार किया है। खास बात यह है कि अभी तक पंजाब, हरियाणा जैसे प्रदेशों में भी इस नस्ल को बढ़ावा नहीं मिला है। मंडी और कुल्लू में इसका पालन किया जा रहा है। ऊन, मांस के लिए यह प्रजाति बहुत ही फायदेमंद है। इस नस्ल की भेड़ का वजन 25 से 30 किलोग्राम तक हो सकता है।
विज्ञापन


रनवीर सिंह खूब कमा रहे पैसे
सरकाघाट की मसेरन पंचायत के पशुपालक रनवीर सिंह ने बताया कि उनको जब अविशान नस्ल की भेड़ के बारे में पता चला तो उन्होंने इसके बारे में पूरी जानकारी हासिल की। वे राजस्थान गए। वहां के संस्थान से भेड़ खरीदकर लाए। वे जनवरी में भेड़ लाए तो उस समय भेड़ ने दो मेमने दिए, जबकि इसी साल सितंबर में भेड़ ने चार और मेमनों को जन्म दिया। इन मेमनों को वह छह-छह हजार में बेच चुके हैं। इससे उनको फायदा हुआ। उन्होंने पशुपालकों से भी आग्रह किया है कि भेड़ व्यवसाय में आकर फायदा कमा सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्थानीय भेड़ों से ज्यादा फायदेमंद
अविशान नस्ल की भेड़ स्थानीय भेड़ों की अपेक्षा कई गुणा फायदेमंद है। स्थानीय भेड़ साल में एक-एक या दो मेमने ही दे सकती है। जबकि अविनाश भेड़ साल में चार से छह मेमने दे सकती है। इससे अधिक फायदा होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed