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अफ्रीकी जनजाति सिद्धि का नृत्य देख दर्शक हुए मंत्रमुग्ध
Thu, 28 Mar 2019 10:18 AM IST
अरविन्द ठाकुर
खेमराज शर्मा, अमर उजाला, बिलासपुर
खेमराज शर्मा, अमर उजाला, बिलासपुर
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 28 Mar 2019 10:18 AM IST
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सिद्धि जनजाति नृत्य
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अफ्रीका से 750 साल पहले अहमदाबाद आए सिद्धि जनजाति के लोगों के वंशज आज भी अपनी संस्कृति को संजोए हुए हैं। बिलासपुर में चल रहे जनजातीय समारोह में सिद्धि वंशज के कलाकारों की प्रस्तुति देखकर लोग दंग रह गए। हवा के नारियल उछालकर उसे सिर से फोड़ना और माचिस की तीली से मुंह से आग निकालना हैरान करने वाला नजारा था।
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अमर उजाला से बातचीत में कलाकारों की टीम के इंचार्ज फारूख उमर सिद्धि ने कहा कि उनके पूर्वज सिद्धि 750 साल पहले अफ्रीका से गुजरात आए थे। तब से वह यहीं पर बस गए। वह यहां हकीक पत्थर का व्यापार करने आए थे। उनका कहना है कि करीब 650 साल पहले अहमदाबाद बादशाह के महल में रखवाली करते थे, क्योंकि सिद्धि जनजाति के लोग खासा दमखम रखते थे।
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बादशाह के महल में 12 दरवाजे थे, जिनकी रखवाली 12 सिद्धि लोग करते थे। फारूख का कहना है कि उनका ग्रुप देश के बाहर भी अपना नृत्य पेश करने जाता है। वह अफ्रीका के इशोपिया, सैनेगल, जोहानिसबर्ग, लंदन, स्कॉटलैंड, गलास्को, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी में भी विशेष बुलावे पर शो कर चुके हैं। फारूख ने बताया कि सिद्धि सेईद की जाली जो अहमदाबाद में है व झूलता मीनार जो सारंगपुर में है, वह उनके पूर्वजों ने बनाया है। गुजरात सरकार इसे ऐतिहासिक धरोहर घोषित कर अपने अधीन ले चुकी है। झूलता मीनार की खासियत यह है कि इसकी एक दीवार को हिलाया जाए तो पूरी मीनार हिल जाती थी।
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