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हिमाचल में होगी कैंसर की रामबाण औषधि अश्वगंधा की खेती

Thu, 26 Dec 2019 05:31 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोगिंद्रनगर (मंडी)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोगिंद्रनगर (मंडी) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 26 Dec 2019 05:31 PM IST
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ashwagandha farming in himachal pradesh and govt scheme for farmers
- फोटो : अमर उजाला

कैंसर और मानसिक रोगों के लिए असरदार औषधीय गुणों से भरपूर अश्वगंधा की खेती अब सूबे के किसान कर सकेंगे। समुद्रतल से 14 सौ मीटर से नीचे वाले क्षेत्रों में पारंपरिक खेती से हटकर विकल्प के तौर पर अश्वगंधा की खेती अपनाई जा सकती है। आयुर्वेदिक औषधीय पौधे को बिलासपुर, ऊना, मंडी, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर, हमीरपुर और कुल्लू में आसानी से उगाए जा सकेगा।

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रिसर्च के बाद इसका खुलासा राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के अंतर्गत राज्य औषधीय पादप बोर्ड क्षेत्रीय और सुगमता केंद्र उत्तर भारत जोगिंद्रनगर के अधिकारियों ने किया है। बोर्ड के माध्यम से खेती करने पर किसानों को वित्तीय सहायता भी मिलेगी। जिसमें प्रति हेक्टेयर लगभग 11 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। किसान व्यक्तिगत या सामूहिक तौर पर अश्वगंधा की की खेती अपना सकते हैं। क्षेत्रीय निदेशक, क्षेत्रीय और सुगमता केंद्र उत्तर भारत डॉ. अरुण चंदन ने इसकी पुष्टि की है। 
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एक एकड़ से 12 हजार तक शुद्ध आय
रिसर्च के दौरान आंकड़े सामने आए हैं कि 7-8 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर के लिए पर्याप्त होता है और इसकी रोपाई जून-जुलाई नर्सरी के दो महीने बाद की जा सकती है। पौधों को 4-6 इंच की दूरी पर प्रत्यारोपित किया जाता है। अश्वगंधा की फसल मात्र 5-6 महीने में ही तैयार हो जाती है। प्रति एकड़ इसकी उपज 250 से 300 किलोग्राम तक रहती है।

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अश्वगंधा की जड़ में होते हैं कई एल्केलाइड्स

ashwagandha farming in himachal pradesh and govt scheme for farmers

अश्वगंधाकी जड़ में कई एल्केलाइड्स पाए जाते हैं। इनमें कुस्कोहाइग्रीन, एनाहाइग्रीन, ट्रोपीन, स्टुडोट्रोपीन, ऐनाफेरीन, आईसोपेलीन, टोरीन और तीनप्रकार के ट्रोपिलीटग्लोएट शामिल है और इनकी मात्रा 0.13 से 0.31 प्रतिशत तक होती है। इसके अलावा जड़ में स्टार्च, शर्करा, ग्लाइकोमाइड्स-हेट्रियाकाल्टेन, अलसिटॉल और विदनाल, तने में प्रोटीन और बहुत से अमीनो अम्ल भी पाए जाते हैं। 

इन बीमारियों के लिए लाभदायी
कई रिसर्च में यह बताया गया है कि अश्वगंधा कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है और कैंसर के नए सेल्स नहीं बनने देता। यह शरीर में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज का निर्माण करता है। जो कैंसर सेल्स को खत्म करने और कीमोथैरेपी से होने वाले साइड इफेक्ट से भी बचाने का काम करता है।

ऑक्सीडेंट आपके इम्युन सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करता है। जो आपको सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। यह मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्या को ठीक करने में लाभदायक हैं। आंखों की रोशनी से बढ़ाने में भी असरदार है।

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