Flyover Shimla: शिमला में विधानसभा के पास फ्लाईओवर निर्माण के लिए केंद्र से मांगी मंजूरी
होटल होलीडे होम में बुधवार को चौथी सिटी एडवाइजरी फोरम की बैठक की अध्यक्षता करते हुए शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि फ्लाईओवर का निर्माण होने से शहर में यातायात जाम से राहत मिलेगी।
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में विधानसभा के पास बनने वाले फ्लाईओवर का निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सकता है। इसके निर्माण और रेलवे की जमीन के इस्तेमाल को लेकर सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सरकार ने इस प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी के लिए भेज दिया है। होटल होलीडे होम में बुधवार को चौथी सिटी एडवाइजरी फोरम की बैठक की अध्यक्षता करते हुए शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि फ्लाईओवर का निर्माण होने से शहर में यातायात जाम से राहत मिलेगी। उम्मीद है कि जल्द ही इसकी मंजूरी मिल जाएगी। कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के सभी काम 30 जून 2023 तक पूरे कर लिए जाएंगे।
सभी विभागों को इस बारे में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शिमला स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 750 करोड़ रुपये के काम शहर में करवाए जा रहे हैं। ज्यादातर काम पूरे हो चुके हैं जबकि बाकी बचे काम अगले आठ से नौ महीने में पूरे किए जाएंगे। कहा कि शिमला शहर में एक हजार स्ट्रीट लाइटें भी लगाई जाएंगी। इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। कई जगहों पर हाईमास्ट लाइट लगाई गई हैं और बाकी जगह भी यह लाइट जल्द ही लगाई जाएंगी। टनल की खुदाई का काम जल्द पूरा होने वाला है। इसके अलावा लिफ्ट, ओवर ब्रिज, सड़कें चौड़ी करने, फुटपाथ, पार्किंग और एस्केलेटर का निर्माण चल रहा है।
जल्द जनता को मिलेगी राहत: कश्यप
बैठक में सांसद सुरेश कश्यप ने सभी विभागों को तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्यों को पूरा करने को कहा ताकि जनता को इनकी सुविधाएं मिल सकें। कहा कि शहर में 48 से अधिक काम पूरे भी हो चुके हैं जिसका लाभ जनता को मिलना शुरू हो चुका है। बैठक में प्रोजेक्ट के प्रबंध निदेशक मनमोहन शर्मा ने मिशन पर आधारित कामों की प्रस्तुति दी।
अफसरों के साथ बैठक हितधारक नहीं बुलाए
सिटी एडवायजरी फोरम की बैठक इस बार महज औपचारिकता ही रही। इसमें ज्यादातर अफसर ही मौजूद रहे। ज्यादातर हितधारकों को बैठक में नहीं बुलाया गया। पूर्व पार्षद भी बैठक का हिस्सा नहीं बने। कारोबारियों की ओर से भी सिर्फ संजीव गुट को बैठक की सूचना थी। हरजीत मंगा की अगुवाई वाले व्यापार मंडल को नहीं बुलाया गया। पर्यटन उद्योग, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि बैठक में नहीं बुलाए गए। बैठक में सिर्फ हो चुके कामों का बखान किया गया। काम की गुणवत्ता और लेटलतीफी पर कोई चर्चा नहीं हुई। इससे पहले होने वाली बैठकों में जनता और जनप्रतिनिधियों से स्मार्ट सिटी पर सुझाव लिए जाते रहे हैं।