सदन में गरमाया नियम 62 के तहत मंडियों में धांधली का मामला
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माकपा विधायक राकेश सिंघा ने प्रदेश की मंडियों में हो रही धांधली से संबंधित मामला उठाते हुए कहा कि नारकंडा, पराला और भट्ठाकुफर में बिचौलिए बागवानों को लूट रहे हैं। सेब बागवानों का आर्थिक रू प से शोषण हो रहा है और उनको फसलों के पूरे दाम तक नहीं मिल रहे।
मंडियों में बागवानों की फसलों के दाम बिना तोले दिए जा रहे हैं। सरकार मौन साधे हुए है। ऐसे में बागवानों की आय दोगुना कैसे होगी। मार्केट फीस सिर्फ मार्केट में फसल बेचने पर ली जाए। आढ़तियों पर नकेल कसी जाए।
बिचौलिए फसल खरीद लेते हैं और फसलों का भुगतान तीन माह बाद किया जाता है। सिंघा के नियम 62 के तहत उठाए मामले का जवाब देते हुए कृषि मंत्री राम लाल मारकंडा ने कहा कि बागवानों का शोषण न हो, सरकार यह सुुनिश्चित करेगी।
बिना तोले मंडियों से बाहर के व्यापारी फसल खरीदते हैं
वह स्वयं मंडियों की नियमित निरीक्षण कर रहे हैं ताकि बागवानों को आर्थिक क्षति न उठानी पड़े। इस दौरान एक बात यह भी सामने आई है कि बागवान खुद समझौता करते हैं। इस कारण से यह दिक्कत आती है।
भट्ठाकुफर मंडी में फसल तोलने के बाद किसानों को दाम दिए जाते हैं। पूरे प्रदेश की मंडियों में 286 कमीशन एजेंट पंजीकृत हैं जबकि मंडियों से बाहर 31 व्यापारियों का पंजीकरण किया गया है। बिना तोले मंडियों से बाहर के व्यापारी फसल खरीदते हैं।
मंडियों में तराजू लगे हैं और फसलों को तोला जाता है। बागवानों को लूटा न जाए, इस संबंध में सरकार ने पत्र भी जारी किए हैं और पुलिस को भी निगरानी रखने को कहा गया है। सेब बेचनेे के बाद लोडिंग की राशि बागवानों से नहीं ली जा सकती।
वर्ष 1977 से पहले बने पुराने भवनों का पुनर्निमाण कर सकेंगे लोग
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के दायरे में वर्ष 1977 से पहले बने भवनों का पुनर्निर्माण किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि 1977 से पहले क्षेत्रों में टीसीपी नियम लागू नहीं थे।
शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी ने यह जानकारी घुमारवीं के विधायक राजेंद्र गर्ग की ओर से पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। सरवीण ने बताया कि हिमाचल में समय-समय पर नए क्षेत्रों में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में शामिल किया गया है।
टीसीपी की शर्तों के मुताबिक कालोनियों और भवनों का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन शर्तों के अलावा और नई छूट देने पर सरकार कोई विचार नहीं रखती है।
यदि कोई कालोनी उस समय के प्रदेश अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट 2005 जो 19 जुलाई, 2005 में लागू होने से पहले निर्मित हुई हो यदि कालोनी वर्ष 2013 मेें नगर ग्राम योजना अधिनियम 1977 से किए गए डीम्ड प्लानिंग एरिया के प्रावधान से पहले निर्मित हुई हो
नेताओं, अफसरों को खेल संघ अध्यक्ष बनाने पर प्रतिबंध नहीं
प्रदेश सरकार ने खेल संघों में राजनीतिज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के अध्यक्ष बनने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। खेल मंत्री गोविंद ठाकुर ने कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर के सवाल पर यह लिखित जवाब दिया है।
खेल मंत्री ने बताया कि खेल संघों का अपना संविधान होता है, जिसके अनुसार खेल संघों द्वारा चुनाव करवाए जाते हैं। यदि राज्य में सामानांतर खेल संघ कार्य कर रहे हैं। मामला न्यायालय में विचाराधीन हो तो सरकार द्वारा कोई भी कदम उठाया जाना संभव नहीं है।
उन्होंने बताया कि खेल संघों को उत्तरदायी बनाने के लिए सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी राज्य व जिला खेल संघों द्वारा उनके संविधान अनुसार चुनाव करवाए जाएं और सभी जिला खेल संघ राज्य खेल संघों से मान्यता प्राप्त होने चाहिए।