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Himachal High Court: गैर शिक्षकों के 2,000 खाली पदों पर सरकार से मांगा जवाब
Mon, 10 Oct 2022 07:22 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 10 Oct 2022 07:22 PM IST
सार
सरकारी स्कूलों में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट और लाइब्रेरियन के 2,000 से ज्यादा खाली पद पड़े हैं। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में जवाब दायर न करने पर सुनवाई नहीं हो पाई।
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हिमाचल हाईकोर्ट
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट और लाइब्रेरियन के 2,000 से ज्यादा खाली पद पड़े हैं। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में जवाब दायर न करने पर सुनवाई नहीं हो पाई। अदालत के दो बार आदेश देने के बावजूद भी सरकार की ओर से जवाब दायर करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई। मुख्य न्यायाधीश एए सैयर और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने राज्य सरकार को जवाब दायर करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। तत्तापानी निवासी प्रताप सिंह ठाकुर की ओर से मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। खंडपीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव सहित प्रधान सचिव शिक्षा को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया था।
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इस समय में राज्य सरकार जवाब दायर नहीं कर पाई। पत्र के माध्यम से आरोप लगाया गया है कि सरकारी स्कूलों में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट और लाइब्रेरियन के दो हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। सरकारी स्कूलों में इन पदों के खाली रहते बच्चे निजी स्कूलों की तरफ रुख कर रहे हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि गरीब लोग निजी स्कूलों की फीस नहीं दे पाते और सरकारी स्कूलों में पुस्तकालय न होने की वजह से बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं में फेल हो जाते हैं। पत्र के माध्यम से गुहार लगाई है कि राज्य सरकार को सरकारी स्कूलों में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट और लाइब्रेरियन के पद भरने के आदेश दिए जाए। मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के बाद निर्धारित की गई है।
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दागी अधिकारियों के मामले पर सुनवाई 11 अक्तूबर को
प्रदेश के दागी अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनात न किए जाने के मामले पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई होगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना का नाम दागी अधिकारियों की सूची में डालने की गुहार लगाई गई है। बलदेव शर्मा के आवेदन पर हाईकोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि मुख्य सचिव ने प्रबोध सक्सेना का नाम जानबूझ कर दागी अधिकारियों की सूची में नहीं डाला है। हाईकोर्ट में दागी अधिकारियों की सूची दायर करते समय मुख्य सचिव को पता था कि प्रबोध सक्सेना के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है। प्रबोध सक्सेना को फायदा पहुंचाने के लिए उसे संवेदनशील पदों पर तैनात किया गया है।
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दलील दी गई कि प्रबोध सक्सेना के खिलाफ सीबीआई अदालत दिल्ली में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। 350 करोड़ के इस मामले में सीबीआई ने प्रबोध सक्सेना के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इस मामले की पूरी जानकारी होते हुए भी मुख्य सचिव ने अदालत के समक्ष झूठा हल्फनामा दायर किया है। प्रबोध सक्सेना को लाभ पहुंचाने के लिए उसे संवेदनशील पदों पर तैनात किया गया है। इस समय उसके पास वित्त, कार्मिक, पर्यावरण और योजना विभाग का जिम्मा सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त उसे हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष का पदभार भी संभाला गया है।