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दो साल बाद खुले आंगनबाड़ी केंद्र: कहीं गुब्बारे, टॉफिया देकर, कहीं तिलक के साथ नौनिहालों पर बरसाए गए फूल

Wed, 02 Mar 2022 06:53 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 02 Mar 2022 06:53 PM IST
सार

आंगनबाड़ी केंद्र टब्बा में नौनिहालों के आने के बाद हवन करवाया गया। कुल्लू में 1095 आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब दो साल बाद रौनक लौटी। केंद्रों में बच्चों का स्वागत फूल बरसा कर किया गया।

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anganwadi kendra opened in himachal pradesh after two years
आंगनबाड़ी केंद्रों में तिलक लगाकर नौनिहालों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। - फोटो : संवाद

विस्तार

दो साल बाद आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचे नौनिहालों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। कई केंद्रों में बच्चों को गुब्बारे, टॉफिया दी गईं। तो कई स्कूलों में हार पहनाकर बच्चों का हौसला बढ़ाया गया। कई केंद्रों में तिलक और बच्चों की आरती भी उतारी गई। कोरोना एसओपी का कई स्थानों पर कड़ाई से पालन किया गया तो कई केंद्रों में यह टूटते दिखे। हालांकि, पहले दिन नौनिहालों की उपस्थिति कई केंद्रों में कम आंकी गई।

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जो नौनिहाल केंद्र में पहुंचे, उनमें खासा उत्साह देखा गया। ऊना में आंगनबाड़ी केंद्रों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। अभिभावकों ने बच्चों को केंद्र तक पहुंचाया। आंगनबाड़ी केंद्र टब्बा में नौनिहालों के आने के बाद हवन करवाया गया। कुल्लू में 1095 आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब दो साल बाद रौनक लौटी। केंद्रों में बच्चों का स्वागत फूल बरसा कर किया गया। छोटे बच्चों का स्वागत तिलक व पुष्प वर्षा से किया गया।
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सिरमौर के आंगनबाड़ी केंद्रों में बुधवार को बच्चों की संख्या काफी कम रही है। अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्रों में एक या दो बच्चों ने ही उपस्थिति दर्ज करवाई। जो बच्चे पहुंचे भी। वह वापस घर जाने की जिद्द करते नजर आए। इधर, चंबा के आंगनबाड़ी केंद्रों में पहले दिन 60 फीसदी बच्चों की उपस्थिति रही। कोरोना प्रोटोकॉल में सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई थी।
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बच्चों में खासा उत्साह दिखा। अभिभावकों ने भी सरकार का आभार जताया है। अभिभावकों का कहना है कि काफी समय बाद आंगनबाड़ी केंद्र खुले हैं। इससे अब बच्चे पढ़ाई से जुड़ेंगे। कांगड़ा जिले में अभिभावकों ने बच्चों को केंद्र भेजने से परहेज किया। धर्मशाला के दाड़ी क्षेत्र की आंगनबाड़ी झिकली दाड़ी और आंगनबाड़ी नंबर-तीन दाड़ी में अभिभावकों ने एक भी बच्चे को आंगनबाड़ी केंद्र में नहीं भेजा। 

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