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हिमाचल: असलहा-बारूद उद्योग स्थापित करने पर संकट, कंपनी ने मांगी ये छूट
Mon, 25 Oct 2021 11:11 AM IST
अरविन्द ठाकुर
धर्मेंद्र पंडित, शिमला
धर्मेंद्र पंडित, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 25 Oct 2021 11:11 AM IST
सार
प्रदेश में फैक्टरी लगाने के लिए निजी कंपनी को एक हजार एकड़ जमीन की जरूरत होगी। देश की यह पहली कंपनी है जो इस तरह की इकाई स्थापित कर रही है। उद्योग विभाग ने कंपनी को जमीन दिखा दी है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ में असलाह-बारूद उद्योग स्थापित करने पर संकट के बादल छा गए हैं। कंपनी ने प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए प्रदेश सरकार से रियायतें मांगी हैं। इसमें कम से कम रेट पर जमीन और बिजली में निर्धारित उद्योग पॉलिसी से 15 फीसदी से कम छूट और स्टांप ड्यूटी, आधारभूत ढांचे में रियायत देने की शर्त रखी है। राज्यों में उद्योग स्थापित करने के लिए सरकारों में प्रतिस्पर्धा चल रही है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारें भी उद्योग लगाने के लिए कंपनियों पर रियायतें संबंधित दबाव बना रही हैं।
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प्रदेश में उपचुनाव खत्म होने के बाद सरकार इस मामले में कंपनी से बात करेगी। फैक्टरी स्थापित करने के लिए सरकार ने कंपनी के साथ 5000 करोड़ रुपये का एमओयू साइन किया है। इस फैक्टरी में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
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प्रदेश में फैक्टरी लगाने के लिए निजी कंपनी को एक हजार एकड़ जमीन की जरूरत होगी। देश की यह पहली कंपनी है जो इस तरह की इकाई स्थापित कर रही है। उद्योग विभाग ने कंपनी को जमीन दिखा दी है। अब उद्योग विभाग की ओर से औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। कंपनी की ओर से उद्योग लगाने के लिए जो जरूरतें रहेंगी, उसकी फाइल तैयार कर सरकार को मंजूरी के लिए भेजी जानी है।
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उपचुनाव के बाद होनी है इन्वेस्टर्स मीट की सेकंड ग्राउंड सेरेमनी
उपचुनाव खत्म होने के बाद प्रदेश में इन्वेस्टर्स मीट की सेकंड ग्राउंड सेरेमनी होनी है। इसमें सरकार ने उद्योग स्थापित करने के लिए कंपनियों के साथ 15 हजार करोड़ रुपये के एमओयू साइन करने हैं। इससे पहले प्रदेश सरकार की दिल्ली में उद्योगपतियों के साथ 5000 करोड़ के एमओयू साइन करने की प्लानिंग थी। अभी चुनाव आचार संहिता के चलते यह मामला लटक गया है।