कुल्लू दशहरा: नियम टूटने पर खुद चलने लगता है देवता का रथ
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क्षेत्र के देवी-देवताओं के थानेदार कहे जाने वाले देवता धूमल नाग का रथ नियम टूटने पर अपने स्थान से खुद ही चलना शुरू हो जाता है। मान्यता है कि रथ जमीन पर रखा होता है, लेकिन नियम टूटने पर यह खुद ही खिसकना शुरू हो जाता है। देव परंपराओं का निर्वहन करने के बाद ही ये देवता शांत होता है।
यह किस्सा एक बार नहीं कई बार हो चुका है। इसीलिए देवता के रथ को देव रस्सी के साथ बांधकर रखा गया होता है। यह देवता नाग का रूप है, जो नियम तोड़ने पर जल्दी क्रोध में आ जाता है। यही नहीं, मूल मंदिर में भी देवता के रथ को खोल कर अलग-अलग स्थानों पर रखा जाता है।
देवता बनाते हैं मेले में पूरी व्यवस्था
धूमल नाग देवता के पुजारी रोशन लाल और कारदार जवाहर लाल ने बताया कि देवता दशहरा उत्सव में क्षेत्र के अधिष्ठाता देव रघुनाथजी की चाकरी करने के लिए आते हैं। देवता मेले में पूरी व्यवस्था बनाते हैं। रघुनाथजी की शोभायात्रा के लिए देवता खुद रास्ता तैयार करते हैं। देव उत्सव दौरान किसी भी प्रकार की चूक देवता सहन नहीं करते।
उन्होंने कहा कि देवता भले ही अस्थाई शिविर में बैठे हों, लेकिन दशहरा की पूरी व्यवस्था पर नजर रहती है। उनका दावा है कि किसी भी नियम के टूटने पर देवता का रथ अपने स्थान से स्वयं ही खिसकना शुरू हो जाता है। इस लिए देवता के रथ को देव रस्सी के साथ बांधा गया होता है।
उपायुक्त के दफ्तर पहुंच गए थे देवता- गत वर्ष भी दशहरे में धूमल नाग देवता परंपराओं का निर्वहन न होने पर उपायुक्त कार्यालय में पहुंच गए थे। यहां उपायुक्त को कार्यालय से बाहर बुलाकर गूर के माध्यम से अपनी बात कही थी। उपायुक्त के हामी भरने पर ही देवता शांत हुए थे।