क्या शिमला का नाम बदलकर 'श्यामला' करना चाहिए?
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देश में शहरों के नाम बदलने की कवायद के तहत अब ऐतिहासिक शहर शिमला का नाम बदलने की चर्चाएं जोरों पर हैं। शिमला का नाम बदलकर 'श्यामला' करने को लेकर बाकायदा अभियान चल हुआ है।
विश्व हिंदू परिषद शिमला का नाम बदलने के लिए काफी समय से सरकार से मांग कर रही है। स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार भी कह चुके हैं कि शिमला का नाम बदलने में कोई नुकसान नहीं। सीएम जयराम ने इस मामले पर विचार करने की बात कही।
सोशल मीडिया पर भी पिछले कई दिनों से शिमला का नाम बदलने को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री सहित पूरा विपक्ष इसके विरोध में उतर आया है। कई बुद्धिजीवी भी नाम बदलने के विरोध में हैं।
हालांकि, सरकार की तरफ से नाम बदलने या इससे संबंधित कोई अधिकारिक एलान नहीं हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या शिमला का नाम बदलकर 'श्यामला' करना चाहिए या नहीं? इस मुद्दे पर पाठक अपनी प्रतिक्रिया हां या नहीं में दे सकते हैं।
शिमला के इतिहास पर एक नजर
शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी है। ब्रिटिश शासन के दौरान पूर्व में ग्रीष्मकालीन राजधानी थी। शिमला नाम की उत्पत्ति को लेकर बहुत विवाद है। अभूतपूर्व विस्तार के साथ तेजी से उभरता हुआ शिमला अपनी औपनिवेशिक विरासत एवं भव्य पुरानी इमारतों के लिए जाना जाता है।
इसमें से कुछ सुप्रसिद्ध नाम वाइसरीगल लॉज, आकर्षक आयरन लैंप पोस्ट और एंग्लो-सैक्सन हैं। मॉलरोड पर विभिन्न प्रकार की दुकानें ,भोजनालय शहर के आकर्षण का केंद्र है। स्कैंडल प्वाइंट पटियाला के पूर्व महाराजा की एतिहासिक घटना से जुड़ा हुआ है। 1946 में भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के नेताओं ने एक महत्वपूर्ण सम्मेलन के लिए शिमला एकत्र हुए और आजादी के लिए स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया।